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US changes H-1B and L-1 rules; visa extensions to incur fees of thousands of dollars.
US Visa Fee Hike: अमेरिका ने विदेशी कर्मचारियों के वीजा आवेदनों से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियम के तहत बड़े नियोक्ताओं को कर्मचारियों के वीजा विस्तार के लिए भी अतिरिक्त शुल्क देना होगा। इससे अमेरिका में बड़ी संख्या में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने वाली भारतीय आईटी और कंसल्टिंग कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।
नए नियमों के मुताबिक, बड़े नियोक्ताओं को H-1B वीजा के आवेदन के लिए 4,000 डॉलर का अतिरिक्त शुल्क देना होगा। यह शुल्क अब केवल शुरुआती आवेदन या नौकरी बदलने की स्थिति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वीजा विस्तार के मामलों में भी लागू होगा।
पहले H-1B वीजा विस्तार के लिए इस तरह का शुल्क नहीं लिया जाता था। नए प्रावधान से उन कंपनियों पर खास असर पड़ सकता है जो अपने कर्मचारियों के वीजा को नियमित रूप से बढ़वाती हैं।
L-1 वीजा के मामले में भी नियमों में बदलाव किया गया है। इसके तहत पात्र बड़े नियोक्ताओं को L-1 वीजा आवेदन के लिए 4,500 डॉलर का शुल्क देना होगा। वीजा विस्तार के दौरान भी यह अतिरिक्त लागत लागू होगी। L-1 वीजा का इस्तेमाल मुख्य रूप से बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने कर्मचारियों को अमेरिका स्थित कार्यालयों में स्थानांतरित करने के लिए करती हैं।
अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) के मुताबिक, यह शुल्क 9 सितंबर से लागू होगा। इसे '9/11 Response and Biometric Entry-Exit Fee' के तहत लागू किया जा रहा है। नया प्रावधान सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू नहीं होगा। इसके लिए नियोक्ताओं को निर्धारित कर्मचारी और वीजा स्थिति से जुड़ी शर्तें पूरी करनी होंगी।
नियम के तहत अमेरिका में 50 या उससे अधिक कर्मचारी रखने वाले और जिनके कर्मचारियों में 50 प्रतिशत से अधिक H-1B या L-1 जैसे गैर-आप्रवासी वीजा स्टेटस वाले कर्मचारी हैं, उन नियोक्ताओं पर यह शुल्क लागू होगा।
इसका सबसे ज्यादा असर इन क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों पर पड़ने की संभावना है:-
टेक्नोलॉजी कंपनियां
IT सर्विस प्रोवाइडर्स
ग्लोबल कंसल्टिंग कंपनियां
मल्टीनेशनल कंपनियां
बड़ी संख्या में H-1B और L-1 कर्मचारियों वाली संस्थाएं
भारत की कई प्रमुख IT सर्विस और कंसल्टिंग कंपनियां 'ऑनशोर-ऑफशोर' मॉडल पर काम करती हैं। इस मॉडल में कुछ कर्मचारी भारत जैसे देशों में रहकर काम करते हैं, जबकि जरूरत के अनुसार कर्मचारियों को अमेरिका भेजा जाता है।
ऐसी कंपनियां बड़ी संख्या में H-1B और L-1 वीजा का इस्तेमाल करती हैं। इसलिए वीजा विस्तार पर भी शुल्क लागू होने से उनके इमिग्रेशन और कर्मचारी तैनाती खर्च में बढ़ोतरी हो सकती है।
बार-बार वीजा बढ़वाने पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
नए नियम का एक महत्वपूर्ण असर यह होगा कि किसी कर्मचारी के लिए बार-बार वीजा विस्तार कराने वाली कंपनियों को हर बार अतिरिक्त आवेदन शुल्क का सामना करना पड़ सकता है। इससे विदेशी प्रतिभाओं पर अधिक निर्भर कंपनियों के लिए अमेरिका में कर्मचारियों को बनाए रखना पहले की तुलना में महंगा हो सकता है। कंपनियों को अब कर्मचारियों की तैनाती, वीजा अवधि और इमिग्रेशन लागत की योजना बनाते समय इन अतिरिक्त शुल्कों को भी शामिल करना होगा।
भारतीय पेशेवरों पर भी पड़ सकता है अप्रत्यक्ष असर
अमेरिका में भारतीय पेशेवरों की बड़ी संख्या H-1B और अन्य रोजगार-आधारित वीजा कार्यक्रमों के माध्यम से काम करती है। ऐसे में कंपनियों की इमिग्रेशन लागत बढ़ने का असर भविष्य में कर्मचारियों की तैनाती और अमेरिका में नए कर्मचारियों को भेजने की रणनीति पर भी पड़ सकता है। हालांकि, शुल्क का सीधा भुगतान नियोक्ता द्वारा किया जाना है, इसलिए इसका तत्काल वित्तीय बोझ कंपनियों पर पड़ेगा।