

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Unique protest outside Parliament over the Ram Mandir offering controversy; seer community outraged by the Opposition's theatrics.
नई दिल्ली। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मुद्दे को लेकर विपक्ष ने संसद परिसर के बाहर अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पूर्णिया सांसद पप्पू यादव पुजारी के वेश में नजर आए, जबकि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसद प्रतीकात्मक रूप से उन्हें चढ़ावा देते दिखाई दिए। इस प्रदर्शन ने राजनीतिक हलकों के साथ संत समाज में भी तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी।
विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शन के जरिए आरोप लगाया कि राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती गई। प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव ने पुजारी का रूप धारण किया और अन्य विपक्षी नेताओं ने उन्हें प्रतीकात्मक चढ़ावा अर्पित किया। इस पूरे घटनाक्रम ने संसद परिसर में लोगों का ध्यान खींचा।
भारतीय जनता पार्टी ने इस प्रदर्शन को हिंदू आस्था का अपमान करार दिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल करना उचित नहीं है। भाजपा ने विपक्ष पर करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।
अखिल भारतीय संत समिति और अन्य संत संगठनों ने भी प्रदर्शन पर आपत्ति दर्ज कराई। संतों का कहना है कि धार्मिक परंपराओं और संत वेश का इस तरह राजनीतिक उपयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने इसे सनातन परंपरा का अनादर बताते हुए जिम्मेदार नेताओं से सार्वजनिक माफी की मांग की।
कुछ संत संगठनों ने पप्पू यादव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए उनकी लोकसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि सार्वजनिक जीवन में धार्मिक प्रतीकों का सम्मान बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद परिसर में इस प्रकार के प्रदर्शन पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संसद की गरिमा और मर्यादा बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है। संसद परिसर में किसी भी प्रकार का ऐसा आचरण उचित नहीं माना जा सकता, जिससे सदन की प्रतिष्ठा प्रभावित हो।
घटना के बाद पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। विपक्ष जहां अपने प्रदर्शन को भ्रष्टाचार के आरोपों के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध बता रहा है, वहीं भाजपा और संत समाज इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।