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CG Vidhansabha Budget Session 2026: Uproar over paddy procurement erupts in Chhattisgarh Assembly, Congress walks out upset with minister's reply
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज सोमवार को धान खरीदी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। बस्तर क्षेत्र में पंजीकृत किसानों का धान नहीं खरीदे जाने के मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। विपक्षी विधायकों के तीखे सवालों के बीच सदन में जमकर बहस हुई और अंततः भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विधायकों ने वॉकआउट कर दिया।
बस्तर के किसानों का मुद्दा सदन में उठा
कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल ने बस्तर के किसानों से धान खरीदी नहीं किए जाने का मामला उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। इस पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि 44,612 किसान धान खरीदी केंद्रों में धान बेचने ही नहीं आए। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने धान खरीदी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए गड़बड़ी और जबरन रकबा समर्पण कराने का आरोप लगाया।
भूपेश बघेल ने भी उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंत्री से पूछा कि कितने किसानों से रकबा समर्पण कराया गया और कितने किसानों से जबरन रकबा समर्पण कराया गया है। इस मुद्दे पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
विपक्ष ने कहा- मंत्री दे रहे रटा-रटाया जवाब
विपक्षी विधायकों ने आरोप लगाया कि मंत्री हर सवाल के जवाब में एक ही बात दोहरा रहे हैं। मंत्री दयालदास बघेल का कहना था कि जो किसान धान लेकर खरीदी केंद्रों तक आए, उनका धान खरीदा गया है, जबकि जिन किसानों का आंकड़ा सामने आ रहा है वे समिति तक धान बेचने नहीं पहुंचे।
कवासी लखमा ने उठाए किसानों के सवाल
कोंटा विधायक कवासी लखमा ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि बस्तर आदिवासी क्षेत्र है और प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद आदिवासी किसानों का धान क्यों नहीं खरीदा गया। उन्होंने कहा कि कई किसानों ने कर्ज लेकर खेती की है, उन्हें बेटी की शादी और घर बनाने जैसे काम करने हैं, लेकिन धान नहीं बिकने से वे परेशान हैं।
लखमा ने सवाल उठाया कि पांच जिलों में 32,200 किसानों का धान क्यों नहीं खरीदा गया। उन्होंने यह भी कहा कि कई किसानों को टोकन जारी होने के बावजूद धान खरीदी नहीं की गई, जबकि गिरदावरी और पंजीयन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।
धान खरीदेंगे या कर्ज माफ करेंगे?
लखमा ने सरकार से पूछा कि जिन किसानों का पंजीयन और टोकन जारी होने के बावजूद धान नहीं खरीदा गया है, उनका धान खरीदा जाएगा या फिर उनका कर्ज माफ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान एक ओर कर्ज में डूबे हैं और दूसरी ओर उनका धान भी नहीं खरीदा गया है।
मंत्री का जवाब
खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने जवाब में कहा कि राज्य में इस बार पिछले वर्ष की तुलना में कई जिलों में दोगुना और कुछ जिलों में तीन गुना तक धान खरीदी की गई है। हालांकि विपक्ष मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और सदन से बहिर्गमन कर दिया।