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Uproar ranging from the Parliament march to the streets... traffic in Delhi stalled for hours, and political tensions escalated.
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में एक महीने से चल रहे सीजेपी के प्रदर्शन ने उस समय बड़ा मोड़ ले लिया, जब संसद मार्च के दौरान हालात बिगड़ गए। शांतिपूर्ण मार्च के आह्वान के बावजूद बड़ी संख्या में पहुंचे प्रदर्शनकारी सुरक्षा व्यवस्था को तोड़ते हुए आगे बढ़ गए, जिसके बाद नई दिल्ली इलाके में कई घंटे तक तनाव की स्थिति बनी रही।
सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके की अगुवाई में निकाले गए संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई जगहों पर झड़प हुई। रायसीना मार्ग, संसद मार्ग और जनपथ क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों ने जमकर विरोध किया।पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान करीब 25 सरकारी और निजी वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। कई स्थानों पर सार्वजनिक संपत्ति को भी क्षति पहुंची।
बिगड़ती स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों समेत 178 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।घायलों में करीब 118 पुलिसकर्मी और 60 प्रदर्शनकारी शामिल बताए जा रहे हैं।
प्रदर्शन के कारण नई दिल्ली और सेंट्रल दिल्ली के कई रास्तों पर यातायात प्रभावित रहा। पुलिस ने सुरक्षा कारणों से कई मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी थी।ऑफिस जाने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर सामान्य सफर में लगने वाला समय कई गुना बढ़ गया।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा रही है।प्रदर्शनकारियों को हटाने के बाद पुलिस ने जंतर मंतर क्षेत्र को खाली कराया। हालांकि बाद में सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने केरल भवन के बाहर फिर धरना शुरू कर दिया।
सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया।उन्होंने दावा किया कि कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। वहीं पुलिस की ओर से पूरे घटनाक्रम को लेकर जांच और कार्रवाई जारी है।
संसद का मानसून सत्र भी पहले दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया। विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में नारेबाजी की।हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार बाधित हुई और अंत में दोनों सदनों को अगले दिन तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
विपक्ष के विरोध के बीच सरकार की ओर से कई विधेयक पेश करने की तैयारी थी, लेकिन हंगामे के कारण कुछ प्रस्तावित कार्य प्रभावित हुए।राज्यसभा में राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण संशोधन विधेयक भी सूचीबद्ध था, लेकिन कार्यवाही बाधित होने के कारण इसे पेश नहीं किया जा सका।
सीजेपी के प्रदर्शन और संसद में विपक्ष के विरोध के कारण सोमवार को राजधानी का माहौल पूरी तरह राजनीतिक गतिविधियों से घिरा रहा। अब पुलिस कार्रवाई और आगे की रणनीति को लेकर आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।