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Weather Report: Monsoon momentum slows down. 17 states record 64% less rainfall than normal; monsoon clouds missing from satellite images.
नई दिल्ली। देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की एंट्री को 11 दिन से अधिक समय हो चुके हैं, लेकिन इसकी रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और हालिया सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि देश के बड़े हिस्से में मानसूनी गतिविधियां कमजोर हो गई हैं। सामान्यतः जून के मध्य तक बादलों से ढका रहने वाला भारत का बड़ा भूभाग इस बार काफी हद तक साफ नजर आ रहा है।
सामान्य से 64 प्रतिशत कम बारिश दर्ज
आईएमडी के अनुसार, 4 जून से 15 जून के बीच देश में औसतन 53.7 मिमी वर्षा होनी चाहिए थी, लेकिन इस अवधि में केवल 19.2 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। इस तरह देश में सामान्य से 64 प्रतिशत कम बारिश हुई है। बारिश की कमी का असर विशेष रूप से मध्य, दक्षिणी और पूर्वी भारत में देखने को मिल रहा है।
महाराष्ट्र और बिहार के आसपास ठहरा मानसून
मानसून दक्षिण भारत से आगे बढ़ने के बाद महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के क्षेत्रों में ठहर गया है। वहीं पूर्वोत्तर राज्यों को कवर करने के बाद इसका विस्तार बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक पहुंचकर धीमा पड़ गया है। मानसून की कमजोर गतिविधियों के कारण छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, बिहार और महाराष्ट्र सहित 17 राज्यों में बारिश का इंतजार लंबा हो गया है।
रेनफॉल डिपार्चर मैप में सूखे जैसे हालात
आईएमडी के रेनफॉल डिपार्चर मैप में मध्य, दक्षिणी और पूर्वी भारत के बड़े हिस्से पीले और लाल रंग में दिखाई दे रहे हैं, जो सामान्य से काफी कम वर्षा और सूखे जैसी स्थिति का संकेत देते हैं। 15 जून को INSAT-3DS सैटेलाइट द्वारा ली गई तस्वीरों में भी प्रायद्वीपीय और मध्य भारत के ऊपर बादलों की कमी स्पष्ट दिखाई दी।
विशेषज्ञों ने बताया मानसून के ठहराव की वजह
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति फिलहाल "मॉनसून ब्रेक" या "मॉनसून का ठहराव" है। विशेषज्ञों के मुताबिक समुद्री परिस्थितियों की बजाय ऊपरी वायुमंडल में हो रहे बदलाव इसके लिए जिम्मेदार हैं।
इस समय 'वेस्टरली जेट स्ट्रीम' यानी पश्चिमी हवाओं का प्रवाह सामान्य स्थिति से काफी दक्षिण की ओर खिसक गया है। इससे मानसून को आगे बढ़ाने वाली 'ईस्टरली जेट' यानी पूर्वी हवाओं की प्रणाली प्रभावित हो रही है, जिसके कारण मानसून की प्रगति धीमी पड़ गई है।
16 जून: इन राज्यों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट
बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बारिश की संभावना। बिहार के कुछ इलाकों में 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भारी बारिश के आसार। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में गरज-चमक के साथ बारिश तथा 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।
17 जून: पूर्वोत्तर में भारी बारिश, मध्य भारत में आंधी-बारिश के संकेत
सिक्किम, उत्तर बंगाल, असम और मेघालय में भारी बारिश की संभावना। राजस्थान और मध्य प्रदेश में बारिश के साथ 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में गरज-चमक के साथ वर्षा होने के आसार। तमिलनाडु, पुडुचेरी, कर्नाटक और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।
किसानों और आम लोगों की बढ़ी चिंता
मानसून की धीमी रफ्तार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई बड़े पैमाने पर बारिश पर निर्भर करती है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में मानसून के दोबारा सक्रिय होने की संभावना है, जिससे वर्षा की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है।