

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Welfare of officials and employees prioritized over welfare of the differently-abled; CBI probe reveals irregularities worth ₹40 crore.
राज्य में दिव्यांगों के पुनर्वास और कल्याण के लिए संचालित संस्थाओं में करीब 40 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो यानि सीबीआइ ने जांच पूरी कर ली है। करीब 1000 करोड़ रुपए के कथित घोटाले के आरोपों से शुरू हुई जांच में फिलहाल वर्ष 2004 से 2018 के बीच लगभग 40 करोड़ रुपए की गड़बड़ी सामने आई है। आरोप का प्रमुख आधार कर्मचारियों के नाम पर हुई सैलरी विड्रॉल है। हाई कोर्ट में प्रस्तुत रिकॉर्ड के मुताबिक राज्य सरकार की जांच में भी बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था। इसमें आरोप यह भी रहा, कि पीआरआरसी में वास्तविक गतिविधियां अपेक्षित रूप से संचालित नहीं थीं, लेकिन कर्मचारियों के नाम पर लगातार राशि निकाली जाती रही। सीबीआइ ने दस्तावेजों और बयानों का आधार पर जांच का दायरा तय किया है। अब जांच पूरी होने के बाद आरोपित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अब सीबीआइ इस मामले में कई अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल करने की तैयारी में है। जांच के दौरान समाज कल्याण विभाग से जुड़े करीब 30 आधिकारियों और कर्मचारियों स पूछताछ की गई है।
यह मामला समाज कल्याण विभाग के अधीन दिव्यांग पुनर्वास से जुड़े स्टेट रिसोर्स सेंटर यानि एसआरसी और फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर यानि पीआरआरसी से जुड़ा है। इस मामले में आरोप यह है, कि इन संस्थानों में सिर्फ कागजों पर कर्मचारियों की फर्जी नियुक्ति दिखाकर उनके नाम पर वेतन और अन्य मदों में सरकारी राशि विड्रॉल की गई। सीबीआइ ने पिछले वर्ष अक्टूबर में माना स्थित दोनों केंद्रों में छापेमारी कर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए थे। जांच के दौरान समाज कल्याण विभाग के सचिव का बयान भी दर्ज किया गया है।
आपको बता दें, कि कुशालपुर निवासी कुंदन सिंह ठाकुर की याचिका पर हाई कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआइ ने इस मामले में एफआइआर दर्ज की थी। इसमें आपराधिक षडयंत्र, सरकारी कर्मचारी द्वारा विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं लगाई गई थीं। एफआइआर में संस्थाओं के गठन और संचालन के जुड़े कई तत्कालीन अधिकारियों पर भी आरोप लगाए गए हैं। इनमें पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड, एमके राऊत, बीएल अग्रवाल और पीपी श्रोती समेत अन्य अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी आरोप सामने आए थे।