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प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संभल की एक मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने के प्रशासनिक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन पर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना हर हाल में सरकार की जिम्मेदारी है और यदि अधिकारी इसे संभालने में सक्षम नहीं हैं तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए या तबादला करा लेना चाहिए।
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने मुनाजिर खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में कहा गया है कि याची मस्जिद में अन्य लोगों के साथ नमाज अदा करना चाहता है, लेकिन जिला प्रशासन ने 20 लोगों से अधिक के नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि राज्य का दायित्व है कि हर समुदाय को निर्धारित स्थान पर शांतिपूर्ण तरीके से प्रार्थना करने का अवसर मिले। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति निजी संपत्ति पर पूजा या प्रार्थना करना चाहता है तो इसके लिए प्रशासनिक अनुमति की आवश्यकता नहीं होती। अनुमति केवल तब जरूरी है जब पूजा या प्रार्थना सार्वजनिक भूमि या लोक संपत्ति पर की जानी हो।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जिस जमीन पर मस्जिद होने का दावा किया जा रहा है, वह गाटा संख्या 291 है और राजस्व अभिलेखों में उसका स्वामित्व मोहन सिंह और भूराज सिंह के नाम दर्ज है। सरकारी वकील ने अदालत से राजस्व अभिलेख और स्थल के फोटोग्राफ दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 16 मार्च की तिथि निर्धारित कर दी।
इससे पहले इसी खंडपीठ ने बरेली से जुड़े एक समान मामले में जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को 23 मार्च को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। साथ ही अदालत ने मकान मालिक हसीन खान को 24 घंटे सशस्त्र सुरक्षा प्रदान करने का आदेश भी दिया है। यह निर्देश तारिक खान की याचिका पर दिया गया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि 16 जनवरी को स्थानीय अधिकारियों ने निजी आवास के अंदर नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी थी।