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नई दिल्ली। भारतीय कुश्ती के युवा सितारे अमन सहरावत ने एशियन गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया है। अमन ने पुरुषों की 57 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती स्पर्धा के फाइनल में उत्तर कोरिया के वर्ल्ड चैंपियन हांग चोंग सोंग को 11-7 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
इस जीत के साथ अमन ने न केवल एशियन गेम्स में अपने पदक का रंग बदला, बल्कि 57 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती में भारत को पहली बार एशियन गेम्स गोल्ड भी दिलाया।
वर्ल्ड चैंपियन को दी मात
फाइनल मुकाबले में अमन का सामना वर्ल्ड चैंपियन हांग चोंग सोंग से था। विश्व रैंकिंग में 32वें स्थान पर मौजूद अमन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने से ऊंची रैंकिंग वाले प्रतिद्वंद्वी को 11-7 के अंतर से शिकस्त दी।
अमन और हांग चोंग सोंग की पिछली एशियन गेम्स की कहानी भी इस मुकाबले को खास बनाती है। 2023 के एशियन गेम्स में अमन ने कांस्य पदक जीता था, जबकि सोंग ने रजत पदक अपने नाम किया था। तीन साल बाद दोनों एक बार फिर आमने-सामने थे, लेकिन इस बार बाजी अमन के हाथ लगी और उन्होंने गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया।
11 साल की उम्र में सिर से उठा माता-पिता का साया
अमन सहरावत की यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उनके जीवन का सफर बेहद मुश्किल परिस्थितियों से होकर गुजरा है। अमन ने महज 11 साल की उम्र में अपने माता-पिता को खो दिया था। इतनी कम उम्र में माता-पिता को खोने का दर्द झेलने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी।
कुश्ती उनके जीवन में सिर्फ खेल बनकर नहीं आई, बल्कि उन्हें एकाग्रता, अनुशासन और आगे बढ़ने का मकसद भी दिया। उन्होंने अपनी मेहनत को ही अपनी ताकत बनाया और धीरे-धीरे राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनानी शुरू की।
सुशील कुमार से मिली प्रेरणा, छत्रसाल में निखरी प्रतिभा
अमन सहरावत ओलिंपिक पदक विजेता सुशील कुमार से प्रेरित हुए। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित छत्रसाल स्टेडियम में प्रशिक्षण शुरू किया, जहां कोच ललित कुमार ने उनकी प्रतिभा को निखारने में अहम भूमिका निभाई।
ट्रेनिंग के दौरान अमन ने अपनी आक्रामक ग्रैपलिंग शैली पर खास तौर पर काम किया। उनकी तकनीक, आक्रामकता और मुकाबले के दौरान दबाव बनाए रखने की क्षमता धीरे-धीरे उनकी पहचान बनती चली गई।
अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी रचा था इतिहास
अमन ने 2022 में स्पेन में आयोजित अंडर-23 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा था। वह इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने थे।
इसके बाद उन्होंने सीनियर स्तर पर भी अपनी जगह मजबूत करनी शुरू कर दी। 2023 में कजाखस्तान में आयोजित एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में अमन ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
इसके बाद 2023 एशियन गेम्स में उन्होंने कांस्य पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
पेरिस ओलिंपिक में भी जीता था कांस्य
अमन सहरावत का शानदार सफर 2024 पेरिस ओलिंपिक तक पहुंचा। वहां उन्होंने पुरुषों की 57 किग्रा फ्रीस्टाइल स्पर्धा में प्यूर्टो रिको के डेरियन क्रूज को हराकर कांस्य पदक जीता।
इस उपलब्धि के साथ अमन 21 साल और 24 दिन की उम्र में व्यक्तिगत ओलिंपिक पदक जीतने वाले सबसे युवा भारतीय एथलीट बने।
उनके लगातार शानदार प्रदर्शन को देखते हुए 2024 में उन्हें भारत के प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
अब एशियन गेम्स गोल्ड से रचा नया इतिहास
अमन के करियर में एशियन गेम्स 2026 का गोल्ड एक और बड़ी उपलब्धि के रूप में जुड़ गया है। कांस्य से शुरुआत करने के बाद उन्होंने इस बार अपने पदक का रंग बदलते हुए सीधे स्वर्ण पर कब्जा किया।
वर्ल्ड चैंपियन को फाइनल में हराकर हासिल किया गया यह गोल्ड अमन के लिए व्यक्तिगत उपलब्धि से कहीं आगे है। 57 किग्रा फ्रीस्टाइल में भारत का पहला एशियन गेम्स गोल्ड जीतकर उन्होंने भारतीय कुश्ती के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है।
11 साल की उम्र में माता-पिता को खोने वाला यह पहलवान अब अंतरराष्ट्रीय कुश्ती के सबसे बड़े मंचों पर भारत का नाम रोशन कर रहा है। अमन सहरावत की कहानी मेहनत, संघर्ष और लगातार आगे बढ़ते रहने की मिसाल बन चुकी है।