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amit shah on ucc tribal community exemption
नई दिल्ली। बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर नई दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित 'जनजाति सांस्कृतिक समागम' में देश के कोने-कोने से हजारों आदिवासी प्रतिनिधि शामिल हुए। इस भव्य समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की संस्कृति, धर्म और अखंडता की रक्षा के लिए जनजातीय समाज के योगदान को नमन किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आज आदिवासी समाज देश की एकता का उलगुलान (आंदोलन) कर रहा है।
साथ ही, गृह मंत्री ने आदिवासियों के बीच भ्रम फैलाने और देश में भेद पैदा करने वाली ताकतों को कड़े शब्दों में सचेत किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, वन मंत्री केदार कश्यप और दिल्ली की सीएम आतिशी (रेखा गुप्ता) समेत कई दिग्गज नेता मौजूद रहे।
समारोह के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर चल रहे भ्रम को पूरी तरह दूर कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया आदिवासियों पर समान नागरिक संहिता (UCC) लागू नहीं होगी। विरोधी इस पर सिर्फ भ्रम और राजनीति फैला रहे हैं।
गुजरात और उत्तराखंड जैसे राज्यों में भी आदिवासियों को यूसीसी के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है, ताकि उनकी पारंपरिक व्यवस्था और संस्कृति सुरक्षित रहे।
गृह मंत्री ने आंकड़ों के जरिए पूर्ववर्ती सरकारों और वर्तमान मोदी सरकार के कामकाज की तुलना की।
उन्होंने कहा कि, कांग्रेस के शासनकाल में जनजातीय विकास का बजट जहाँ सिर्फ 28,000 करोड़ रुपये था, उसे बढ़ाकर अब 1.50 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।
आदिवासियों के स्वशासन, जल, जंगल, जमीन और संस्कृति के संरक्षण के लिए पूरे देश में मध्य प्रदेश के 'पेसा कानून' (PESA) का मॉडल लागू किया जा रहा है। शाह ने बताया कि देश अब पांच दशक पुरानी नक्सली और माओवादी समस्या से पूरी तरह मुक्त होने की राह पर है। पूर्व में नक्सली और माओवादी हिंसा में 40,000 से अधिक लोग मारे गए थे, लेकिन अब सुरक्षा बलों के कड़े कदमों से इस पर लगाम लगी है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने छत्तीसगढ़ के संदर्भ में एक बेहद महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि विकास रोकने वाली ताकतों ने जिन इलाकों को पीछे धकेला था, वहां अब विकास पहुंच रहा है। छत्तीसगढ़ के बस्तर में जहाँ पहले सुरक्षा बलों के कैंप लगाए गए थे, वहाँ अब 70 वीर गुंडाधुर सेवा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय जनता को सीधी मदद और सुविधाएं मिल सकेंगी।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आज देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संथाल परिवार से हैं, और छत्तीसगढ़ व ओडिशा जैसे राज्यों में भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री भी आदिवासी समाज से ही आते हैं, जो यह दिखाता है कि आज देश का नेतृत्व आदिवासियों के हाथों में सुरक्षित है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जनजातीय समाज केवल प्रकृति का रक्षक ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप है।
सीएम साय ने कहा “सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते हुए जनजातीय समाज ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाए रखा है। आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट और असंतुलित विकास की चुनौतियों से जूझ रही है, तब जनजातीय जीवन दर्शन ही मानवता को टिकाऊ और प्रकृति-सम्मत विकास का रास्ता दिखा सकता है।”