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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ भविष्य में दर्ज होने वाली किसी भी नई एफआईआर पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने उन्हें राहत के लिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट जाने की सलाह दी है।
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई। बेंच में सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जायमाल्या बागची शामिल थे। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि किसी भी जांच एजेंसी को जांच शुरू करने से पहले ही रोक लगाने का आदेश नहीं दिया जा सकता।
दरअसल, छत्तीसगढ़ में लगभग 2,000 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले की जांच का सामना कर रहे पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि उनके खिलाफ किसी भी नए मामले में एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगाई जाए।
पूर्व आईएएस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने अदालत में दलील दी कि टुटेजा पिछले लगभग 20 महीनों से जेल में हैं। जैसे ही किसी एक मामले में उन्हें जमानत मिलती है, किसी दूसरे मामले में उन्हें फिर गिरफ्तार कर लिया जाता है। उनका कहना था कि जांच एजेंसियां एक पैटर्न के तहत कार्रवाई कर रही हैं ताकि उन्हें लगातार जेल में रखा जा सके।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से अतिरिक्त सालिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत को बताया कि संभावित गिरफ्तारी की आशंका के आधार पर सभी जांच एजेंसियों को नए केस दर्ज करने से रोकना संभव नहीं है। यदि किसी मामले में किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो एजेंसियों को जांच और कानूनी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता को किसी मामले में गिरफ्तारी की आशंका है तो वे छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल कर सकते हैं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि ऐसी याचिकाओं पर दो से चार सप्ताह के भीतर फैसला किया जाए।