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रायपुर। छत्तीसगढ़ के पहले लोकपर्व हरेली के अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बुधवार को नवा रायपुर स्थित अपने शासकीय निवास में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हरेली तिहार मनाया। उन्होंने गौमाता और कृषि औजारों नांगर, गैती, कुदारी सहित अन्य उपकरणों की विधिवत पूजा-अर्चना की।
हरेली की परंपरा के तहत अरुण साव ने अपने निवास के प्रवेश द्वार पर आरोग्य और हरियाली के प्रतीक नीम की डाली भी लगाई। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में अच्छी बारिश, खेतों में लहलहाती फसल, किसानों की समृद्धि और प्रदेशवासियों की खुशहाली की कामना की।
खेती-किसानी और लोक संस्कृति से जुड़ा पर्व
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रदेशवासियों को हरेली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की माटी, खेती-किसानी और लोक संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ पर्व है। इस पर्व में गेड़ी सहित छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं और ग्रामीण जीवन की झलक देखने को मिलती है।

उन्होंने कहा कि हरेली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति और अन्नदाता के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर भी है। यह पर्व छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण जीवन की आत्मीयता को दर्शाता है।
लोक परंपराओं के संरक्षण पर जोर
अरुण साव ने कहा कि हमारी लोक परंपराएं और त्योहार ही हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं। आने वाली पीढ़ियों तक इन परंपराओं को पहुंचाने के लिए इनका संरक्षण और संवर्धन करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
हरेली के मौके पर प्रदेशभर में किसानों और ग्रामीण अंचलों में कृषि औजारों की पूजा, नीम की डाली लगाने, गेड़ी चढ़ने और पारंपरिक खेलों जैसी गतिविधियों के जरिए छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और परंपराओं की जीवंत झलक देखने को मिल रही है।