

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

avimukteshwaranand-bilaspur-statement-criticism-yogi-ugc
बिलासपुर। बुधवार को बिलासपुर पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राजनीतिक दलों और सरकारों पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वे लगातार गौ रक्षा का मुद्दा उठाते रहे हैं, लेकिन विभिन्न सरकारें इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही हैं। इसके अलावा शंकराचार्य ने यूजीसी के नए नियमों और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर भी कड़े बयान दिए।
शंकराचार्य ने कहा कि वे लंबे समय से गौ रक्षा के मुद्दे पर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकारें इसे नजरअंदाज कर रही हैं। उनका आरोप है कि सत्तारूढ़ दल उनकी आवाज को दबाने के लिए हिस्ट्रीशीटरों का सहारा ले रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आवाज दबाने के बजाय उसे सुनना और उसका समाधान करना चाहिए।
शंकराचार्य ने यूजीसी के नए नियमों को ‘हिंदुओं को बांटने वाला’ और ‘राष्ट्रद्रोह’ करार दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में इस कानून का क्रियान्वयन नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि यह नियम हिंदुओं के बीच मतभेद पैदा कर सकता है और देश की संस्कृति को नुकसान पहुंचा सकता है।
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सनातन धर्म पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इसे किसी बाहरी व्यक्ति से खतरा नहीं है, बल्कि असली खतरा अंदर मौजूद कालनेमियों से है। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा करने के लिए समाज के भीतर जागरूकता और सतर्कता जरूरी है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति पर बोलते हुए शंकराचार्य ने कहा कि वहां की नीयत केवल वोट हासिल करना है, हिंदुओं के हित में काम करने की कोई मंशा नहीं दिखती। उन्होंने योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें 40 दिन का समय दिया गया था, लेकिन वे खुद को साबित नहीं कर पाए। इस आधार पर उन्होंने कहा कि वे ‘असली हिंदू नहीं’ हैं।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का यह बयान स्थानीय समाज और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कार्यक्रम में अपने विचार साझा करने के साथ-साथ समाज को जागरूक करने की अपील भी की।