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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक पॉडकास्ट चर्चा के दौरान भाजपा में शामिल होने के संकेत मिलने का दावा किया। उनके इस बयान के बाद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीखा पलटवार करते हुए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। मामला अब बयानबाज़ी से आगे बढ़कर इंटरनेट मीडिया पर पोस्टर वॉर तक पहुंच गया है।
राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल के साथ चर्चा के दौरान भूपेश बघेल ने दावा किया कि उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली बुलाया था और उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी कराई गई थी।
बघेल के अनुसार, बातचीत के दौरान उनके करीबी सहयोगियों पर चल रहे मामलों में राहत दिलाने का संकेत दिया गया और इशारों में भाजपा में शामिल होने का प्रस्ताव रखा गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब-जब वे दिल्ली से लौटे, उसके बाद उनके करीबियों पर केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो जाती थी।
भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को “हास्यास्पद” और “बेबुनियाद” बताया है। कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि भूपेश बघेल की जरूरत न तो छत्तीसगढ़ को है और न ही भाजपा को। वहीं बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने इसे ऊलजलूल बयान करार देते हुए कहा कि जो नेता अपनी ही पार्टी में अप्रासंगिक हो चुके हैं, वे सहानुभूति बटोरने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं।
भाजपा का कहना है कि कांग्रेस भ्रष्टाचार के मामलों और जांच से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के आरोप लगा रही है।
विवाद यहीं नहीं रुका। भाजपा के आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल से एआई आधारित व्यंग्यात्मक पोस्टर साझा किए गए। एक पोस्टर में भूपेश बघेल के साथ दीपक बैज और चरणदास महंत को दिखाते हुए उनके बयानों पर तंज कसा गया।
दूसरे पोस्टर में राहुल गांधी के साथ काल्पनिक संवाद दर्शाते हुए शीर्षक दिया गया- “जैसा गुरु वैसा चेला।” इन पोस्टरों के जरिए भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा है।
कांग्रेस इस पूरे प्रकरण को केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग से जोड़ रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्षी नेताओं को दबाव में लाने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं भाजपा इसे कानून सम्मत कार्रवाई बताते हुए कह रही है कि भ्रष्टाचार के मामलों में जांच से किसी को डरना नहीं चाहिए।