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bilaspur high court pulls up chhattisgarh government over power cuts action plan
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में बारिश और आंधी-तूफान के बाद लगातार हो रही बिजली कटौती और जलभराव की समस्या पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने बताया कि बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए विस्तृत एक्शन प्लान तैयार किया गया है और कई सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल कागजी योजनाएं बनाने से काम नहीं चलेगा, उनका प्रभाव जमीनी स्तर पर भी दिखाई देना चाहिए।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि आम लोगों को वास्तविक राहत मिलनी चाहिए। यदि कहीं भी बिजली आपूर्ति बाधित होती है या जलभराव की शिकायत आती है तो उसका तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए।
हाल ही में बिलासपुर में हुई तेज बारिश और आंधी के बाद शहर के कई इलाकों में पूरी रात बिजली गुल रही थी। वीवीआईपी क्षेत्र कलेक्ट्रेट और सिविल लाइन भी इससे अछूते नहीं रहे। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया और जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की।
ऊर्जा सचिव और CSPDCL के प्रबंध निदेशक ने शपथपत्र के जरिए कोर्ट को बताया कि राज्य स्तरीय बैठक में बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए 9 महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं।
इनमें प्रमुख निर्णय शामिल हैं-
क्षतिग्रस्त सीमेंट पोल की जगह अब लोहे के खंभे लगाए जाएंगे।
मंगला और कोनी में दो नए सप्लाई जोन बनाए जाएंगे।
10 करोड़ रुपये की लागत से फॉल्ट प्रभावित क्षेत्रों में खुले तारों की जगह कवर्ड केबल बिछाई जाएगी।
बढ़ते लोड को देखते हुए नए सब-स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
पेड़ों की कटाई और फॉल्ट सुधार के लिए अतिरिक्त स्काईलिफ्ट वाहन लगाए जाएंगे।
नई भर्ती के जरिए बिजली विभाग में मैनपावर बढ़ाया जाएगा।
नगर निगम ने भी पेश की तैयारी
नगर निगम कमिश्नर ने अपने शपथपत्र में बताया कि मानसून के दौरान जलभराव से निपटने के लिए विकास भवन में बाढ़ नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। 24 घंटे निगरानी के लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। अप्रैल 2026 से शहर के सभी आठ जोनों में नालियों की सफाई और सिल्ट हटाने का अभियान चलाया जा रहा है, जिसकी जियो-टैग्ड तस्वीरें भी कोर्ट में प्रस्तुत की गई हैं।
हाईकोर्ट ने मांगी प्रोग्रेस रिपोर्ट
शपथपत्रों का परीक्षण करने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सबसे महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि मानसून के दौरान शहर में अनावश्यक जलभराव न हो और बिजली आपूर्ति निर्बाध बनी रहे। साथ ही किसी भी शिकायत का तत्काल निराकरण किया जाए।
डिवीजन बेंच ने ऊर्जा सचिव और नगर निगम आयुक्त को शपथपत्र के साथ प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।