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बिलासपुर। शहर की बदहाल सड़कों को लेकर अब मामला गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। राज्य सरकार द्वारा पांच प्रमुख मार्गों के डामरीकरण को मंजूरी मिलने के बावजूद जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हो पाने से नाराज छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीक्षण अभियंता से जवाब तलब किया है।
सरकार की स्वीकृति के बाद भी टेंडर प्रक्रिया में हो रही देरी के कारण पांच में से केवल एक सड़क पर ही काम शुरू हो पाया है। देवकीनंदन चौक से महामाया चौक तक लगभग 1.30 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए 1.84 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया है। लेकिन बाकी चार सड़कों के प्रस्ताव पिछले दो से ढाई महीने से प्रशासनिक स्तर पर लंबित हैं, जिससे पूरे प्रोजेक्ट की गति थम गई है।
नियमों के अनुसार 15 जून के बाद डामरीकरण कार्य पर रोक लग जाती है। ऐसे में प्रशासन के पास केवल दो महीने का समय बचा है। यदि इस अवधि में काम शुरू नहीं हुआ, तो मानसून के दौरान शहरवासियों को गड्ढों, कीचड़ और खराब सड़कों की समस्या का सामना करना पड़ेगा।
शहर के कई प्रमुख और व्यस्त मार्गों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
पेंड्रीडीह से नेहरू चौक मार्ग: सड़क पर गहरी दरारें और बड़े गड्ढे, जिससे दोपहिया वाहन चालकों के लिए हादसे का खतरा बढ़ गया है।
नेहरू चौक से उसलापुर मार्ग: मुंगेली और कोटा को जोड़ने वाला यह प्रमुख रास्ता पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुका है। भारी वाहनों का दबाव स्थिति को और बिगाड़ रहा है।
हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए PWD अधिकारियों को स्पष्ट जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट यह जानना चाहता है कि स्वीकृति मिलने के बावजूद टेंडर प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है और समय रहते काम शुरू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
लगातार खराब होती सड़कों और बढ़ते हादसों के खतरे के बीच अब शहरवासियों की नजरें प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले मानसून में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।