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बिलासपुर। शहर में पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। 2024 में सरकंडा थाना क्षेत्र से चोरी हुई एक स्कूटी का सुराग दो साल बाद भी पुलिस नहीं लगा सकी और केस बंद कर दिया गया। अब वही चोरी हुई स्कूटी शहर में ट्रैफिक सिग्नल तोड़ती हुई सीसीटीवी कैमरों में कैद हो रही है और ट्रैफिक पुलिस ई-चालान पीड़ित मालिक के घर भेज रही है।
क्या है पूरा मामला?
19 सितंबर 2024 की रात, मुंगेली निवासी और एमसीए (MCA) छात्र स्वप्निल पांडे की सफेद रंग की स्कूटी सरकंडा थाना क्षेत्र से चोरी हो गई थी। यह वाहन उनके पिता रामानंद पांडे के नाम पर पंजीकृत है। पीड़ित ने बताया कि वे वर्तमान में हैदराबाद में 'भारत डायनेमिक्स लिमिटेड' में कार्यरत हैं।
पुलिस द्वारा केस को खात्मे में डाल दिए जाने से निराश पीड़ित ने अब एसएसपी से मामले की शिकायत की है। उन्होंने चोर की जल्द गिरफ्तारी और अपनी स्कूटी बरामद करने की मांग की है। पीड़ित को यह भी डर है कि यदि चोर इस गाड़ी का उपयोग किसी आपराधिक घटना में करता है, तो पुलिस की शुरुआती कार्रवाई वाहन के असली मालिक के खिलाफ हो सकती है।
इस मामले ने बिलासपुर के इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) की पोल खोल दी है। आईटीएसएम (ITMS) में चोरी हुए वाहनों का डेटाबेस लिंक नहीं किया गया है। यदि आईटीएसएम को चोरी के वाहनों के डेटाबेस से जोड़ा जाता, तो कैमरा में गाड़ी आते ही कमांड सेंटर में स्वतः अलर्ट जारी हो जाता। इंटीग्रेशन न होने की वजह से चोरी की गाड़ी शहर में नियम तोड़ती घूम रही है और सिस्टम केवल ई-चालान जारी कर रहा है।