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cbse digital evaluation controversy students future at stake
नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बोर्ड द्वारा लाखों छात्रों के भविष्य को एक ऐसी डिजिटल व्यवस्था और निजी कंपनी के भरोसे छोड़ देने के आरोप लग रहे हैं, जो खुद पूरी तरह से तैयार नहीं थी। धुंधली स्कैन कॉपियां, गलत मूल्यांकन, उत्तर पुस्तिकाओं से पन्नों का गायब होना और एक अंक के बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) के सही उत्तर पर 0.5 अंक दिए जाने जैसे हैरान करने वाले मामले सामने आए हैं।
इस अव्यवस्था के चलते अब ऑफलाइन जांच तक पहुंच चुके मामलों ने पूरी मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, जिस कंपनी को सीबीएसई ने ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन के लिए उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग और तकनीकी ढांचा तैयार करने का जिम्मा सौंपा, उसका ट्रैक रिकॉर्ड पहले से ही विवादित रहा है। कंपनी के कॉर्पोरेट रिकॉर्ड से पता चलता है कि यह वही कंपनी है जो पहले 'ग्लोबएरीना टेक्नोलॉजीज' नाम से काम कर रही थी। इसके निदेशक बी.एस.एन. राजू हैं।
इसी 'ग्लोबएरीना टेक्नोलॉजीज' ने वर्ष 2019 में तेलंगाना इंटरमीडिएट परीक्षा के दौरान भारी गड़बड़ियां की थीं, जिससे वह बड़े विवादों के घेरे में आई थी। बोर्ड को इस कंपनी के पुराने रिकॉर्ड और जोखिमों की पूरी जानकारी थी, इसके बावजूद बिना पर्याप्त तैयारी के इस नई डिजिटल प्रणाली को लागू कर दिया गया।
मूल्यांकन में हुई इस बड़ी लापरवाही से छात्रों में भारी आक्रोश है। छात्रों ने अपनी कॉपियां देखने के बाद कई गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों ने कहा "हमें जो उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराई गईं, उनकी लिखावट तक हमारी नहीं थी।" "कई लिखे हुए पन्नों को खाली (Blank) मान लिया गया, जबकि कई सही उत्तरों पर भी अंक नहीं दिए गए।" "लगातार धुंधली स्कैन कापियां और गायब पन्नों के स्क्रीनशॉट सामने आ रहे हैं।" “एक अंक वाले बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) के सही उत्तर पर हमें 0.5 अंक दिए गए हैं, जिसका कोई तर्क नहीं बनता।”
रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीएसई की संचालन समिति की बैठक में पहले ही यह सुझाव दिया गया था कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को सीधे व्यापक स्तर पर लागू करने से पहले विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाया जाए।
बोर्ड ने व्यापक स्तर पर कोई ठोस परीक्षण नहीं किया।इसके बजाय जनवरी में दिल्ली के महज पांच स्कूलों में सीमित अभ्यास सत्र आयोजित किए गए, जिसमें कुछ चुनिंदा शिक्षक ही शामिल हुए थे।
मामले से जुड़े कुछ शिक्षकों का दावा है कि उन्होंने बोर्ड अधिकारियों को पहले ही सचेत किया था कि इस प्रणाली को लागू करने से पहले शिक्षकों को उचित प्रशिक्षण, बेहतर स्कैनिंग और तकनीकी सुधार की सख्त जरूरत है, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया।