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bilaspur high court denies bail to habitual offender in mungeli liquor case
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि आदतन अपराधी प्रवृत्ति वाले आरोपी को नियमित जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने मुंगेली जिले से जुड़े एक आबकारी मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।
मामले के अनुसार, 24 अप्रैल 2026 को मुंगेली पुलिस को गश्त के दौरान मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति अवैध शराब रखे हुए है। सूचना के आधार पर पुलिस ने छापा मारकर राजेंद्र बंजारे के कब्जे से 55 लीटर देसी शराब बरामद की। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) और 59(ए) के तहत गिरफ्तार किया था।
जमानत याचिका पर सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच में हुई। आरोपी की ओर से अधिवक्ता चंद्रकुमार ने दलील दी कि उसके कब्जे से कोई वस्तु बरामद नहीं हुई है। साथ ही बताया गया कि आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत पांच मामले दर्ज हैं, जिनमें दो मामलों का निपटारा हो चुका है और एक में उसे बरी कर दिया गया है।
बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत न्यूनतम सजा एक वर्ष और अधिकतम तीन वर्ष है। आरोपी 24 अप्रैल 2026 से जेल में बंद है और मुकदमे के जल्द समाप्त होने की संभावना नहीं है, इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी ने जमानत का विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत पांच आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें दो मामले अभी भी लंबित हैं। इससे स्पष्ट होता है कि आरोपी आदतन अपराधी है, इसलिए उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए।
मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि केस डायरी और उपलब्ध तथ्यों का अध्ययन करने पर यह स्पष्ट होता है कि आरोपी के खिलाफ समान प्रकृति के दो मामले अभी लंबित हैं। इससे उसकी आपराधिक प्रवृत्ति सामने आती है।
कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने निर्णय का भी हवाला दिया, जिसमें आरोपी के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड को आधार बनाकर उसकी जमानत रद्द की गई थी।
हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता का आपराधिक रिकॉर्ड यह दर्शाता है कि वह आदतन अपराधी है, इसलिए उसे नियमित जमानत पर रिहा करने का यह उपयुक्त मामला नहीं है। कोर्ट ने इसी आधार पर जमानत याचिका खारिज कर दी।
जस्टिस बीडी गुरु ने आदेश की प्रमाणित प्रति संबंधित निचली अदालत को भेजने का निर्देश हाई कोर्ट रजिस्ट्री को दिया है। साथ ही निचली अदालत को मुकदमे की सुनवाई शीघ्र पूरी करने के लिए स्वतंत्र बताया गया है।