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रायपुर। छत्तीसगढ़ में अफीम की अवैध खेती का मामला सामने आने के बाद सियासत गरमा गई है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) ने मामले की जांच के लिए 10 सदस्यीय जांच दल का गठन किया है। यह जांच दल सीजीएमएससी के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व विधायक डॉ. प्रीतम राम की अगुवाई में काम करेगा।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री संगठन मलकीत सिंह गैंदू के हस्ताक्षर से जारी आदेश में कहा गया है कि जांच दल जल्द संबंधित गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से चर्चा करेगा और पूरे मामले की वस्तुस्थिति पर रिपोर्ट पीसीसी को सौंपेगा।
पत्र के अनुसार, दुर्ग जिले के ग्राम समोदा में बड़े पैमाने पर अफीम की अवैध खेती का मामला सामने आने के बाद बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड के ग्राम पंचायत त्रिपुरी के घोसरापारा में करीब 6.30 एकड़ जमीन पर अफीम की खेती किए जाने का मामला सामने आया है। इसे गंभीरता से लेते हुए पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने जांच समिति का गठन किया है।

जांच समिति में ये सदस्य शामिल
डॉ. प्रीतम राम – पूर्व विधायक (संयोजक)
भानुप्रताप सिंह – पूर्व विधायक
डॉ. अजय तिर्की – पूर्व महापौर
हरिहर प्रसाद यादव – जिला अध्यक्ष
राजेन्द्र तिवारी – पूर्व जिला अध्यक्ष
हरीश मिश्रा – ब्लॉक अध्यक्ष, कुसमी
विजय पैकरा – ब्लॉक अध्यक्ष, शंकरगढ़
अब्दुल्ला खान – ब्लॉक अध्यक्ष, चांदो
राजेन्द्र भगत – अध्यक्ष, नगर पंचायत कुसमी
फिलोमिना टोप्पो – अध्यक्ष, ब्लॉक महिला कांग्रेस
फूलों की आड़ में अफीम की खेती
दुर्ग के बाद अब बलरामपुर जिले के त्रिपुरी क्षेत्र के सरनाटोली गांव में भी करीब 5 एकड़ में अफीम की फसल मिलने से प्रशासन में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने मौके पर सुरक्षा बल तैनात कर दिया है और जांच के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) तथा फोरेंसिक टीम को बुलाया गया है।
पुलिस ने खेत में काम कर रहे झारखंड के पांच लोगों को हिरासत में लिया है और मुख्य सरगना की तलाश जारी है। छापेमारी के दौरान चीरे लगे अफीम के डोडे सूखते हुए मिले, जिनमें से करीब पांच बोरी डोडा जब्त किया गया है।
लीज पर जमीन लेकर की जा रही थी खेती
स्थानीय लोगों के मुताबिक, झारखंड के एक व्यक्ति ने जशपुर जिले के ग्राम राझाडीपा निवासी भाजपा नेता और पूर्व सरपंच जिरमल राम के जरिए किसानों से संपर्क कर जमीन लीज पर ली थी। आरोप है कि फूलों की खेती की आड़ में अफीम उगाई जा रही थी।
बताया जा रहा है कि सरगना गांव में नहीं आता था, जबकि खेती की देखरेख के लिए झारखंड से मजदूर बुलाए गए थे और खेत की निगरानी स्थानीय स्तर पर की जा रही थी। सिंचाई के लिए पास के चूहीदाह नाले में बने स्टाप डेम से पंप लगाकर पानी लाया जाता था।
ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि उन्हें खेत में अफीम उगाने की जानकारी थी, लेकिन यह नहीं पता था कि यह गैरकानूनी है। दुर्ग में इसी तरह के मामले में कार्रवाई होने के बाद उन्हें इसकी जानकारी मिली और उन्होंने पुलिस को सूचना दी।