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रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित कोयला लेवी घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने जांच को आगे बढ़ाते हुए करीब 9,500 पन्नों की छठी पूरक चार्जशीट विशेष अदालत में पेश की है। इसमें भिलाई नगर के कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव, प्रदेश कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, पूर्व विधायक चंद्रदेव राय, कारोबारी आरपी सिंह, विनोद तिवारी, आईएएस अधिकारी जयप्रकाश मौर्य समेत कुल 12 आरोपियों के नाम शामिल किए गए हैं।
EOW की जांच के मुताबिक, कोयला परिवहन से जुड़ी कथित अवैध लेवी वसूली का नेटवर्क कई स्तरों पर संचालित था। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में 477.56 करोड़ रुपये की आय का हिसाब सामने आया है, जबकि कांग्रेस भवन और अन्य माध्यमों से पूर्व विधायकों, नेताओं और अधिकारियों तक कथित तौर पर 104.20 करोड़ रुपये पहुंचाए जाने से जुड़ी प्रविष्टियां जांच में मिली हैं।
उपचुनाव में भी लेवी के पैसे के इस्तेमाल का आरोप
EOW के आरोपपत्र में भिलाई विधायक देवेंद्र यादव से जुड़ी प्रविष्टियों का भी उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, डायरी में खैरागढ़ उपचुनाव और निजी कार्यों के लिए करीब 3 करोड़ रुपये का उल्लेख मिला है।
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में हुए खैरागढ़ विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी यशोदा वर्मा ने 87,879 वोट हासिल कर भाजपा प्रत्याशी को 20,176 मतों के अंतर से हराया था। EOW ने आरोप लगाया है कि कोयला लेवी से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी खर्च में भी किया गया।
रामगोपाल अग्रवाल से जुड़ी डायरियों में 104.20 करोड़ का हिसाब
EOW के मुताबिक, तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल से संबंधित डायरियों में ‘भवन’ और ‘सी पार्टी’ जैसे कोड शब्दों के माध्यम से रकम का हिसाब रखा जाता था। जांच में ऐसी 32 प्रविष्टियों का उल्लेख है, जिनमें कुल 104.20 करोड़ रुपये दर्ज होने की बात कही गई है।
आरोप है कि यह रकम कांग्रेस भवन और पूर्व विधायकों-अधिकारियों तक पहुंचाई गई। जांच एजेंसी ने डायरियों में इस्तेमाल किए गए कोड शब्दों और रकम से संबंधित प्रविष्टियों को अपनी जांच का अहम आधार बनाया है।
किस आरोपी पर क्या आरोप?
EOW की चार्जशीट में आरोपियों की अलग-अलग भूमिका बताई गई है।
रामगोपाल अग्रवाल: डायरियों में ‘भवन’ और ‘सी पार्टी’ के नाम से दर्ज 32 प्रविष्टियों के जरिए 104.20 करोड़ रुपये लेने का आरोप।
देवेंद्र सिंह यादव: खैरागढ़ उपचुनाव और निजी कार्यों के लिए करीब 3 करोड़ रुपये लेने का आरोप।
विनोद तिवारी: करीब 2.12 करोड़ रुपये लेने का आरोप।
आरपी सिंह: करीब 2.93 करोड़ रुपये लेने का आरोप।
चंद्रदेव प्रसाद राय: चुनावी खर्च के लिए करीब 49.50 लाख रुपये और सोने के आभूषण लेने का आरोप।
आईएएस जयप्रकाश मौर्य: पैलेट उद्योगपतियों से 100 रुपये प्रति टन वसूली के निर्देश देने और कथित तौर पर 1 करोड़ रुपये लेने का आरोप।
जोगेंद्र सिंह: आठ फर्मों के जरिए करीब 40 करोड़ रुपये की कथित फर्जी बैंक प्रविष्टियां कराने का आरोप।
इसके अलावा जांच में पियूष साहू, राहुल मिश्रा, नवनीत तिवारी समेत अन्य लोगों से जुड़ी वित्तीय प्रविष्टियों का भी उल्लेख किया गया है।
डायरियों में कोड वर्ड से होता था लेन-देन का हिसाब
EOW के अनुसार, कथित लेवी की रकम का हिसाब रखने के लिए डायरियों और व्हाट्सऐप ग्रुप का इस्तेमाल किया जाता था। जांच में पाल, टुड्ढे, दुर्ग, जुनून जैसे शब्दों के साथ-साथ भवन, सी पार्टी, डी, आरपी, एमयू, नवाज, चंद्र और मौर्य जी जैसे कोड शब्द मिलने की बात कही गई है।
रकम और भुगतान से जुड़े संकेतों के लिए भी अलग-अलग शब्दों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन प्रविष्टियों से कोयला लेवी की रकम को खैरागढ़ उपचुनाव, उत्तर प्रदेश चुनाव, राजीव भवन में भुगतान, अचल संपत्तियों की खरीद, कोयला खदानों, वाहनों और निर्माण कार्यों में इस्तेमाल किए जाने के संकेत मिले हैं।
कोयला परिवहन पर प्रति टन लेवी वसूली का आरोप
EOW के मुताबिक, कथित अवैध वसूली के लिए कोयला परिवहन से जुड़ी अलग-अलग श्रेणियां तय की गई थीं। आरोप है कि कोयला परिवहन पर 25 रुपये प्रति टन, गारे-पलमा कोयले पर 70 रुपये प्रति टन और लौह अयस्क-पैलेट परिवहन पर 100 रुपये प्रति टन तक की कथित वसूली की जाती थी।
जांच एजेंसी का दावा है कि इस रकम को एक संगठित सिंडिकेट के माध्यम से एकत्र किया गया और बाद में अलग-अलग लोगों तथा संस्थाओं तक पहुंचाया गया।
477.56 करोड़ रुपये की आय का दावा
EOW ने करीब 500 करोड़ रुपये के कोयला लेवी घोटाले में अब तक की जांच के आधार पर आरोपियों से संबंधित डायरियों में 477.56 करोड़ रुपये की आय दर्ज होने का दावा किया है। एजेंसी का कहना है कि कथित सिंडिकेट के माध्यम से कोयला परिवहनकर्ताओं से अवैध लेवी वसूली गई।
यह इस मामले में EOW की छठी पूरक चार्जशीट है। आरोपियों को अदालत में पेश होने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। जो आरोपी उपस्थित नहीं हुए हैं, उन्हें अब 5 नवंबर को अदालत में पेश होने का नोटिस दिए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
कांग्रेस पर उपचुनाव में भी लेवी की रकम इस्तेमाल करने का आरोप
इस पूरी चार्जशीट का सबसे राजनीतिक रूप से अहम पहलू यह है कि जांच एजेंसी ने कथित कोयला लेवी की रकम को राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी खर्च से जोड़ने की कोशिश की है। डायरियों में खैरागढ़ उपचुनाव से जुड़ी रकम की प्रविष्टियों के आधार पर EOW ने कांग्रेस नेताओं और पूर्व पदाधिकारियों की कथित भूमिका का उल्लेख किया है।
हालांकि, ये सभी बातें EOW की जांच और चार्जशीट में लगाए गए आरोप हैं। इन आरोपों पर अदालत में सुनवाई होगी और आरोपियों की दोषसिद्धि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।