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chhattisgarh conversion case ed investigates 153 ngos foreign funding
रायपुर: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर और धमतरी जिलों में विदेशी फंडिंग के जरिए चलाए जा रहे अवैध धर्मांतरण के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में जांच का दायरा बढ़ाते हुए 153 ऐसी संस्थाओं (NGOs) को रडार पर लिया है, जिन्हें विदेशों से संदिग्ध धन प्राप्त हो रहा है। राज्य सरकार ने भी इस मामले में कड़े रुख के संकेत दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य के नक्सल प्रभावित बस्तर और धमतरी जिलों में सक्रिय 153 निजी संस्थाओं (NGOs) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इन संस्थाओं पर अमेरिकी मिशनरी संगठनों से अरबों रुपये लेकर आदिवासियों का धर्मांतरण कराने और सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने का गंभीर आरोप है।
इस मामले ने न केवल प्रशासनिक अमले में, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी भूचाल ला दिया है।
जांच में अमेरिकी संस्था 'द टिमोथी इनिशिएटिव' (TTI) केंद्रीय भूमिका में है। डेविड चाको को 'टीटीआइ' के इस कथित कमांडर को मुख्य सूत्रधार बताया गया है, जो 'पाल-टिमोथी' समूहों को प्रशिक्षण देता था। नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच, अंतरराष्ट्रीय एटीएम/डेविड कार्डों के जरिए लगभग 95 करोड़ रुपये भारत लाए गए। अकेले बस्तर और धमतरी में विदेशी एटीएम से 6.5 करोड़ रुपये निकाले जाने का हिसाब मिला है।
सिहावा-नगरी, अंतागढ़, कोयलीबेड़ा, नारायणपुर और नारायणपुर जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में इस पैसे का इस्तेमाल "धर्म प्रचार" के नाम पर लालच देकर धर्मांतरण के लिए किया गया।
राज्य सरकार ने इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी पाए जाने के बाद 84 संस्थाओं की विदेशी फंडिंग रोक दी गई है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा निगरानी बढ़ाने के बाद 127 NGOs की मान्यता पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। गृह विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, बस्तर के लगभग 70 प्रतिशत गांवों में विदेशी धन के दम पर धर्मांतरण अभियान चलाया गया। ED अब उन 18 विशिष्ट संस्थाओं की जांच कर रही है, जिन्हें सीधे विदेशी फंड मिल रहा था।
यह मुद्दा छत्तीसगढ़ की राजनीति के केंद्र में आ गया है। मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विदेशी फंडिंग हुई है और धार्मिक गतिविधियों में इस धन के इस्तेमाल का ईडी ने खुलासा किया है। आगे कड़ी जांच और जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा - "विदेशी फंड पा रही सभी संदेही संस्थाएं जांच के दायरे में हैं। जल्द ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस संस्था ने राशि का कहा और किस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया है।" उन्होंने कड़े संकेत दिए कि सरकार बस्तर में इस नेटवर्क का राजफाश करेगी।
भाजपा प्रवक्ता अनुराग अग्रवाल ने कहा - कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, "कांग्रेस ने लंबे समय से मतांतरण कराने वाले गिरोहों के लिए सुरक्षा कवच का काम किया है।" उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी विदेशी नेक्सस पर कार्रवाई होती है, कांग्रेस जांच एजेंसियों की साख पर सवाल उठाने लगती है।
वहीं राजनांदगांव सांसद संतोष पांडेय ने इस पूरे मामले में कांग्रेस सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा - विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए करोड़ों खपाने का आरोप लगाया और कहा कि “पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार ने केंद्रीय एजेंसियों पर प्रतिबंध लगाकर इस नेटवर्क को फलने-फूलने का मौका दिया।”
भाजपा नेताओं के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने इसे भाजपा का राजनीतिक प्रोपेगेंडा करार दिया और केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने सवाल किया, "जब 2025-26 में केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार है, तो राज्य में विदेशी फंडिंग कैसे आ रही है? क्या डबल इंजन की सरकार सो रही है?" उन्होंने चुनौती दी कि यदि मामला गंभीर है, तो जांच एजेंसियां (जो भाजपा के अधीन हैं) कार्रवाई क्यों नहीं करतीं?
कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने इसे "मोदी-साय सरकार की नाकामी" बताया। शुक्ला ने कहा कि "95 करोड़ रुपये का विदेशी धन भारत आना और उसमें से 6.5 करोड़ छत्तीसगढ़ में निकलना केंद्र की खुफिया विफलता है।" उन्होंने आरएसएस (RSS) के संगठनों की आय और संपत्तियों की भी जांच की मांग उठाई।
धर्मांतरण पर विदेशी फंडिंग के इतने बड़े खुलासे के बाद कई समाज प्रमुखों ने भी चिंता जताई है। छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के प्रांत अध्यक्ष राजाराम तोड़ेम ने विदेशी मिशनरियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि "वे बस्तर की आदिवासी संस्कृति को खत्म करने की साजिश रच रहे हैं।" उन्होंने ग्राम सभा की अनुमति के बिना बने अवैध चर्चों को तोड़ने और टीटीआइ समेत अन्य संस्थाओं की फंडिंग की जांच की मांग की।
साहू समाज के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र साहू ने कहा कि प्रदेश में धर्मांतरण बहुत तेजी से हो रहा है। "इसे रोकने के लिए बने कानून को प्रभावी तौर पर लागू करने की आवश्यकता है।" उन्होंने समाजों से भी अपनी भूमिका निभाने की अपील की।
डॉ. ओमप्रकाश देवांगन (प्रदेश अध्यक्ष, देवांगन समाज) ने सवाल उठाया कि "प्रलोभन देकर जो लोग मतांतरण करवा रहे हैं, उनको पैसा कहां से मिलता है, इसकी जांच होनी चाहिए।" उन्होंने विदेशी फंडिंग की भूमिका पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
बता दें कि हाल ही में विवाद और सामाजिक तनाव को देखते हुए, राज्य सरकार ने 'छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026' को मंजूरी दे दी है, जिसे राज्यपाल रमेन डेका ने भी हरी झंडी दे दी है। नए कानून में सजा के प्रावधान इतने कड़े हैं कि अपराधी की रूह कांप जाए।
बल/लालच/धोखे से धर्मांतरण पर 7 से 10 साल की जेल और न्यूनतम 5 लाख रुपये जुर्माना।
नाबालिग/महिला/SC/ST का धर्मांतरण कराने पर 10 से 20 साल की जेल और 10 लाख रुपये जुर्माना।
सामूहिक धर्मांतरण पर 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और न्यूनतम 25 लाख रुपये का जुर्माना।
दोबारा अपराध करने पर सीधे उम्रकैद।
जांच में यह भी सामने आया है कि विदेशी बैंकों से फंडिंग लेने के लिए FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) के तहत पंजीकरण अनिवार्य है, जो केवल 5 साल के लिए मिलता है। इसके अलावा, नियम है कि
संगठन कम से कम 3 वर्षों से सक्रिय हो। सामाजिक/धार्मिक/सांस्कृतिक क्षेत्र में काम कर रहा हो। 10 लाख से अधिक विदेशी चंदा मिलने पर 90 दिनों के भीतर सरकार को सूचना देना अनिवार्य है। विदेशी चंदा केवल दिल्ली स्थित एसबीआई (SBI) की मुख्य शाखा के खाते के माध्यम से ही लिया जा सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसियां अब इन सभी तकनीकी पहलुओं पर NGOs को तलब कर रही हैं कि उन्होंने इन नियमों का पालन किया या नहीं।