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chhattisgarh guest lecturer policy controversy
छत्तीसगढ़ के शासकीय कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अतिथि व्याख्याताओं की सेवाएं लेने के लिए 17 जुलाई को जारी की गई संशोधित नीति विवादों में घिर गई है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा यह नीति बिना कैबिनेट की मंजूरी के ही जारी कर दी गई, जिसके चलते इस पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नीति में मानदेय और आकस्मिक अवकाश जैसे वित्तीय एवं सेवा शर्तों के प्रावधान शामिल होने के कारण वित्त विभाग ने कड़ी आपत्ति जताई और प्रस्ताव को उच्च शिक्षा विभाग के पास वापस लौटा दिया है।
कैबिनेट की मंजूरी का अभाव: उच्च शिक्षा विभाग ने बिना कैबिनेट की पूर्व अनुमति के ही अतिथि व्याख्याता नीति का संशोधित नोटिफिकेशन जारी कर दिया था।
वित्त विभाग की आपत्ति: नीति में मानदेय और अवकाश जैसे वित्तीय मामलों के होने के कारण वित्त और सामान्य प्रशासन विभाग की मंजूरी अनिवार्य थी, जिसे नजरअंदाज किए जाने पर वित्त विभाग ने प्रस्ताव को लौटा दिया।
बदला हुआ मानदेय और अवकाश प्रावधान: नई संशोधित नीति के तहत अतिथि व्याख्याताओं को अब 2 हजार रुपए प्रति कार्य दिवस (अधिकतम 50 हजार रुपए प्रतिमाह) और हर महीने एक दिन के हिसाब से सत्र में 11 आकस्मिक अवकाश दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
अन्य पदों की दरें: अतिथि ग्रंथपाल व क्रीड़ा अधिकारी के लिए 1,600 रुपए प्रतिदिन, अतिथि शिक्षण सहायक के लिए 1,400 रुपए प्रतिदिन तथा अतिथि ग्रंथालय व क्रीड़ा सहायक के लिए 1,200 रुपए प्रतिदिन तय किया गया है।
उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अतिथि व्याख्याता नीति वर्ष 2024 में बनाई गई थी जिसमें संशोधन किया गया है। वित्त विभाग की आपत्तियों के संबंध में वित्त मंत्री से चर्चा हो चुकी है, और यह स्पष्ट किया कि अतिथि व्याख्याताओं की भर्ती से जुड़ी प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने स्पष्ट किया कि कैबिनेट की मंजूरी के बिना नोटिफिकेशन जारी होने और प्रक्रिया में जो भी त्रुटि हुई है, वह एक अलग विषय है जिसपर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि इसका असर अतिथि व्याख्याताओं की भर्ती प्रक्रिया पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा।