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chhattisgarh high court itr motor accident compensation verdict
रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों में आयकर रिटर्न (ITR) को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर ITR को खारिज नहीं किया जा सकता कि उसमें दिखाई गई आय अनुमानित है। जब तक ITR को फर्जी, मनगढ़ंत या अविश्वसनीय साबित न किया जाए, तब तक मृतक की आय तय करने के लिए उसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाएगा।
यह फैसला एक सड़क दुर्घटना में मृत व्यक्ति के मुआवजे से जुड़े मामले में आया। मृतक निर्माण कार्य से जुड़ा था और हर महीने करीब 60 हजार रुपये कमाता था। उसके परिजनों ने वर्ष 2011-12, 2012-13 और 2013-14 के आयकर रिटर्न अदालत में पेश किए थे तथा आयकर अधिकारी की गवाही भी कराई थी।
इसके बावजूद मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (ट्रिब्यूनल) ने ITR को नजरअंदाज करते हुए मृतक की मासिक आय केवल 7 हजार रुपये मान ली और 14.08 लाख रुपये का मुआवजा तय किया था।
हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के इस फैसले को गलत ठहराते हुए कहा कि विधिवत प्रस्तुत ITR को बिना ठोस कारण के खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने मृतक की वास्तविक आय को स्वीकार करते हुए मुआवजा बढ़ाकर 51.24 लाख रुपये कर दिया। यानी परिजनों को 37.16 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा मिलेगा।
साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि बढ़ी हुई राशि पर दावा याचिका दाखिल करने की तारीख से भुगतान तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी दिया जाए।
यह आदेश जस्टिस संजय के. अग्रवाल की एकलपीठ ने सड़क हादसे से जुड़ी दो अलग-अलग अपीलों की सुनवाई के दौरान पारित किया। इनमें एक अपील मृतक के परिजनों ने मुआवजा बढ़ाने के लिए और दूसरी बीमा कंपनी ने अपनी देयता को चुनौती देने के लिए दायर की थी। हाईकोर्ट के इस फैसले को मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों में ITR की स्वीकार्यता को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।