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बिलासपुर: मोटर दुर्घटना दावा (Motor Accident Claim) मामलों में पीड़ित परिवारों को राहत देते हुए हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया है कि केवल आवेदन में देरी होने के आधार पर क्लेम मामलों को शुरुआती स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि मोटर दुर्घटना से जुड़े मामलों में न्याय का मूल उद्देश्य पीड़ितों को राहत पहुंचाना है, इसलिए तकनीकी आधारों पर दावों को खारिज करना उचित नहीं है। इस फैसले से उन परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, जो किसी कारणवश समय पर दावा पेश नहीं कर पाए थे।
दरअसल, विभिन्न बीमा कंपनियों और वाहन मालिकों की ओर से 40 से अधिक सिविल रिवीजन याचिकाएं दायर की गई थीं। इन याचिकाओं में देरी से दाखिल क्लेम को खारिज करने की मांग की गई थी।
याचिका दायर करने वालों में श्रीराम जनरल इंश्योरेंस, चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड, एसबीआई जनरल इंश्योरेंस, बजाज आलियांज, टाटा एआईजी, ओरिएंटल इंश्योरेंस, मैग्मा एचडीआई और इफको टोक्यो जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल थीं।