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रायपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग में 2011 में हुई सब-इंजीनियर (सिविल) की नियुक्तियों को अवैध मानते हुए रद्द कर दिया। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद योग्यता के मापदंडों में बदलाव नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि यदि विज्ञापन में शैक्षणिक योग्यता के लिए कोई अंतिम तारीख तय की गई है, तो उम्मीदवार के पास उसी दिन तक आवश्यक डिग्री या डिप्लोमा होना जरूरी है। चयन की तारीख को आधार नहीं बनाया जा सकता।
मामला क्या है?
साल 2011 में ग्रामीण अभियांत्रिकी सेवा के तहत सब-इंजीनियर के 275 पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किया गया था। आरोप था कि विभाग ने विज्ञापन की शर्तों का उल्लंघन करते हुए कुल 383 नियुक्तियां कर दीं। इनमें से 89 उम्मीदवारों के पास आवेदन की अंतिम तारीख तक आवश्यक शैक्षणिक योग्यता नहीं थी।
इस भर्ती को चुनौती देते हुए रवि तिवारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सिंगल बेंच ने पहले याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि विभाग ने अंतिम सेमेस्टर में पढ़ रहे उम्मीदवारों को मौका दिया था और कर्मचारी पिछले 14 सालों से सेवा दे रहे हैं।
हाईकोर्ट ने सरकार के सभी तर्क खारिज कर दिए और कहा कि अवैध भर्ती को वैध नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने रिट ऑफ को-वारंटो जारी करते हुए निजी प्रतिवादी क्रमांक 4 से 73 तक की नियुक्तियां रद्द कर दीं।
हालांकि, प्रतिवादी क्रमांक 55 वर्षा दुबे और 64 अभिषेक भारद्वाज को राहत दी गई, क्योंकि उन्होंने कट-ऑफ तारीख से पहले आवश्यक योग्यता पूरी कर ली थी।
कोर्ट ने भले ही नियुक्तियां रद्द की हों, लेकिन लगभग 14 साल तक सेवा देने वाले कर्मचारियों से अब तक दिए गए वेतन और भत्तों की वसूली नहीं करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि लंबी सेवा अवधि किसी अवैध नियुक्ति को वैध नहीं बना सकती।
इस मामले में 2022 में रायपुर के सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप था कि 275 पदों के लिए 383 नियुक्तियां की गई और 89 उम्मीदवार कट-ऑफ तारीख के बाद योग्य पाए गए। जांच में पता चला कि 89 में से 19 उम्मीदवार पहले ही पद छोड़ चुके थे।
राज्य सरकार की तीन समितियों ने भी इन 89 नियुक्तियों को अवैध माना था, लेकिन तब भी उन्हें हटा नहीं गया।