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chhattisgarh municipal elections evm voting rules amendment 2026
रायपुर। छत्तीसगढ़ में आगामी नगरीय निकाय चुनाव को लेकर राज्य सरकार ने अहम बदलाव किया है। अब प्रदेश में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) के माध्यम से कराए जाएंगे। इसके लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने छत्तीसगढ़ नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 में संशोधन किया है। संशोधित नियमों से संबंधित अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित कर दी गई है। यह बदलाव राज्य निर्वाचन आयोग के प्रस्ताव के आधार पर किया गया है।
नियमों में पहली बार स्पष्ट रूप से EVM का प्रावधान
संशोधित नियमों में मतदान प्रक्रिया के लिए ईवीएम के इस्तेमाल को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। अब चुनाव संबंधी प्रावधानों में केवल मतपत्र का ही उल्लेख नहीं होगा, बल्कि उसके साथ 'मतदान मशीन' का भी प्रावधान रहेगा।
इस बदलाव के बाद नगरीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली चुनावी सामग्री और मतदान से जुड़े नियमों की भाषा में भी संशोधन किया गया है। पुराने प्रावधानों में जहां 'मतपेटियां' शब्द का इस्तेमाल होता था, वहां अब 'मतदान हेतु निर्वाचन सामग्रियां' शब्द का प्रयोग किया जाएगा।
इसी तरह जहां 'मतपत्र' का उल्लेख है, वहां अब 'मतपत्र अथवा मतदान मशीन' शब्द जोड़ा गया है। वहीं चुनावी सामग्री को रखने या व्यवस्थित करने से संबंधित नियमों में 'पैकेट' शब्द की जगह अब 'सामग्री' शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा।
मतदान के रिकॉर्ड में भी होगा बदलाव
ईवीएम से चुनाव कराने के साथ ही मतदान के रिकॉर्ड और मतगणना से संबंधित प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है। संशोधित प्रारूपों के अनुसार पीठासीन अधिकारी को मतदान के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां अलग-अलग दर्ज करनी होंगी।
पीठासीन अधिकारी को ईवीएम में दर्ज कुल मतदाताओं की संख्या और वास्तव में डाले गए मतों की संख्या का अलग-अलग रिकॉर्ड रखना होगा। इसके साथ ही NOTA (उपर्युक्त में से कोई नहीं) को मिले मतों की संख्या भी अलग से दर्ज की जाएगी।
इसके अलावा अंडर वोट और अधूरे दर्ज मतों की जानकारी भी रिकॉर्ड में शामिल करनी होगी। इससे मतदान प्रक्रिया के दौरान दर्ज होने वाले प्रत्येक प्रकार के वोट का अलग-अलग हिसाब रखा जा सकेगा।
वोट नहीं डालने पर 'मतदान से इन्कार' माना जाएगा
संशोधित नियमों में मतदान के दौरान ऐसी स्थिति को भी स्पष्ट किया गया है, जब किसी मतदाता को मतदान करने की अनुमति मिल जाती है, लेकिन वह ईवीएम पर अपना वोट दर्ज नहीं करता।
ऐसी स्थिति में इसे मतदान से इन्कार माना जाएगा। यानी मतदाता की पहचान और मतदान की अनुमति मिलने के बाद यदि ईवीएम पर वोट दर्ज नहीं किया गया, तो उसकी स्थिति को नियमों के अनुसार रिकॉर्ड किया जाएगा।
चुनाव अधिकारियों को भेजी गई संशोधित नियमों की जानकारी
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने संशोधित निर्वाचन नियमों की जानकारी संबंधित अधिकारियों को भेज दी है। इसमें राज्य निर्वाचन आयोग, संभागीय अधिकारी, नगर निगम आयुक्त और मुख्य नगर पालिका अधिकारी शामिल हैं।
इस संशोधन के बाद नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियों में ईवीएम आधारित मतदान व्यवस्था को औपचारिक रूप से शामिल किया जा सकेगा। चुनाव अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इसी के अनुरूप मतदान और रिकॉर्ड संधारण की प्रक्रिया अपनानी होगी।
अभ्यर्थियों की जानकारी के लिए भी नया प्रारूप
नगरीय निकाय चुनाव में उम्मीदवारों से संबंधित जानकारी दर्ज करने के लिए भी नया प्रारूप तैयार किया जाएगा। इस प्रारूप में प्रत्याशी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल रहेंगी।
नए प्रारूप में अभ्यर्थी की फोटो, पता और राजनीतिक दल से संबंधित जानकारी दर्ज की जाएगी। इससे मतदाताओं और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के लिए उम्मीदवारों की पहचान और उनकी राजनीतिक संबद्धता की जानकारी एक निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध होगी।
नगरीय चुनाव की प्रक्रिया में आएगा बदलाव
राज्य सरकार द्वारा नियमों में किए गए इस संशोधन का सबसे बड़ा असर नगरीय निकाय चुनाव की मतदान प्रक्रिया पर पड़ेगा। अब मतदान से लेकर रिकॉर्ड तैयार करने और मतगणना तक की प्रक्रिया में ईवीएम को नियमों के तहत स्पष्ट स्थान मिल गया है।
सरकार की ओर से राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित किए जाने के बाद यह बदलाव आगामी नगरीय निकाय चुनावों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे चुनाव संचालन से जुड़े अधिकारियों के लिए भी ईवीएम के इस्तेमाल, रिकॉर्ड संधारण और विभिन्न प्रकार के मतों की जानकारी दर्ज करने को लेकर नियम अधिक स्पष्ट हो गए हैं।