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रायपुर। लंबित मांगों के निराकरण की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन ने बुधवार को राजधानी रायपुर में सांकेतिक प्रदर्शन किया। रायपुर मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग कर्मचारियों ने कैंडल मार्च निकालकर शासन का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित किया। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि लंबे समय से लंबित मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों के मुताबिक ग्रेड-पे समेत नर्सिंग कर्मचारियों की विभिन्न मांगें पिछले करीब 15 वर्षों से लंबित हैं। संगठन का आरोप है कि इन मांगों को लेकर लगातार शासन का ध्यान आकर्षित किया जाता रहा है, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। इसी के विरोध में नर्सिंग स्टाफ ने कैंडल मार्च निकालकर अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाईं।
ग्रेड-पे और पदनाम बदलने की मांग
प्रदर्शन के दौरान नर्सिंग कर्मचारियों ने ग्रेड-पे वेतनमान का प्रस्ताव जल्द स्वीकृत कर आदेश जारी करने की मांग की। इसके साथ ही नर्सिंग स्टाफ के पदनाम में बदलाव की मांग भी दोहराई गई। संगठन की मांग है कि नर्सिंग स्टाफ नर्स का पदनाम बदलकर नर्सिंग ऑफिसर और नर्सिंग सिस्टर का पदनाम बदलकर सीनियर नर्सिंग ऑफिसर किया जाए।
एसोसिएशन का कहना है कि वर्ष 2018 में भी इन मांगों को लेकर पहल की गई थी, लेकिन अब तक उनका समाधान नहीं हो पाया है।
नर्सिंग और ड्रेस अलाउंस बढ़ाने की मांग
एसोसिएशन ने अपनी मांगों में नर्सिंग अलाउंस और ड्रेस अलाउंस में बढ़ोतरी को भी शामिल किया है। संगठन की ओर से नर्सिंग अलाउंस 7,200 रुपये और ड्रेस अलाउंस 1,800 रुपये प्रतिमाह करने की मांग रखी गई है।
इसके अलावा वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति, नियमित पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी करने और कार्यरत संविदा व दैनिक वेतनभोगी स्टाफ नर्सों को प्राथमिकता देने की मांग भी की गई है।
संविदा नर्सों के वेतन और छात्रों के स्टाइपेंड का मुद्दा
नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन ने संविदा नर्सों के न्यूनतम वेतन को 40 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग रखी है। वहीं प्रशिक्षण ले रहे नर्सिंग छात्र-छात्राओं के स्टाइपेंड में भी बढ़ोतरी की मांग की गई है। संगठन के अनुसार वर्तमान स्टाइपेंड को 1,500 रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये किया जाना चाहिए।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो चरणबद्ध आंदोलन
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि कैंडल मार्च और सांकेतिक प्रदर्शन के जरिए फिलहाल सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित किया गया है। यदि जल्द मांगों का निराकरण नहीं किया गया तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा।
नर्सिंग कर्मचारियों का कहना है कि वे स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए उनकी वर्षों से लंबित मांगों पर शासन को गंभीरता से विचार करते हुए जल्द निर्णय लेना चाहिए।