

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

chhattisgarh-sc-st-act-cases-2023-2026
रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले तीन वर्षों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC-ST) एक्ट के तहत दर्ज मामलों को लेकर बड़ा आंकड़ा सामने आया है। 1 जनवरी 2023 से 16 फरवरी 2026 तक राज्य में कुल 2455 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले रेप के हैं, जो कुल मामलों का लगभग 41 प्रतिशत यानी 1013 केस हैं। यानी दर्ज हर तीन मामलों में से लगभग एक मामला रेप से जुड़ा हुआ है।
यह जानकारी 12 मार्च को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान सामने आई। बीजेपी विधायक पुन्नूलाल मोहले द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने लिखित रूप में यह आंकड़े सदन में प्रस्तुत किए। सरकार के अनुसार यह डेटा राज्य के सभी जिलों से प्राप्त रिकॉर्ड के आधार पर तैयार किया गया है।
महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या सबसे ज्यादा
सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार SC-ST एक्ट के तहत दर्ज मामलों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या सबसे अधिक है। कुल 2455 मामलों में से 1013 मामले रेप के हैं। इसके अलावा 73 मर्डर के मामले दर्ज किए गए हैं।
वहीं मारपीट कर चोट पहुंचाने के 380 मामले दर्ज हुए हैं, जबकि गंभीर चोट पहुंचाने के 60 मामले सामने आए हैं। इसके अतिरिक्त 30 मामलों में अपहरण की घटनाएं भी दर्ज की गई हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के खिलाफ विभिन्न प्रकार के अपराध राज्य में दर्ज किए गए हैं।
जांजगीर-चांपा और बलरामपुर में सबसे ज्यादा केस
सरकार द्वारा प्रस्तुत जिलेवार आंकड़ों के अनुसार कुछ जिलों में मामलों की संख्या ज्यादा सामने आई है। जांजगीर-चांपा जिले में सबसे अधिक 168 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद बलरामपुर जिले में 165 मामले सामने आए हैं। इन दोनों जिलों में दर्ज मामलों की संख्या राज्य में सबसे ज्यादा है।
सरकार के मुताबिक राज्य के 33 जिलों में से 8 जिलों में 100 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इन जिलों में लगातार शिकायतें दर्ज होने के कारण मामलों की संख्या अधिक दिखाई देती है।
2269 मामलों में कोर्ट में पेश हुआ चालान
विधानसभा में सरकार ने यह भी जानकारी दी कि बड़ी संख्या में मामलों में पुलिस ने जांच पूरी कर अदालत में चालान पेश कर दिया है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के अनुसार 2269 मामलों में पुलिस ने अदालत में चालान प्रस्तुत किया है।
इसके अलावा 166 मामलों की जांच अभी जारी है। इन मामलों में पुलिस जांच पूरी होने के बाद अदालत में रिपोर्ट पेश करेगी। वहीं 20 मामलों में केस खारिज कर दिए गए हैं या क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई है।
पीड़ितों को आर्थिक सहायता का प्रावधान
विधायक पुन्नूलाल मोहले ने यह भी सवाल किया था कि क्या SC-ST एक्ट के तहत पीड़ितों को आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। इस पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि इस कानून के तहत पीड़ितों को मुआवजा देने का प्रावधान है और अपराध की प्रकृति के आधार पर अलग-अलग राशि तय की गई है।
उन्होंने बताया कि 16 फरवरी 2026 तक 1647 मामलों में पीड़ितों को आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। सरकार के अनुसार अब तक पीड़ितों को 28 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आर्थिक मदद के रूप में प्रदान की गई है।
670 मामलों में सहायता की प्रक्रिया लंबित
सरकार ने यह भी बताया कि अभी भी कई मामलों में आर्थिक सहायता की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। 670 मामलों में सहायता की प्रक्रिया लंबित है। इन मामलों में प्रस्ताव आदिम जाति विकास समिति की मंजूरी के लिए भेजे गए हैं। मंजूरी मिलने के बाद पीड़ितों को सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
विधानसभा में सवाल के जरिए सामने आए इन आंकड़ों से स्पष्ट हुआ है कि राज्य में SC-ST एक्ट के तहत बड़ी संख्या में मामले दर्ज हुए हैं। सरकार के अनुसार अधिकांश मामलों में पुलिस ने जांच पूरी कर अदालत में चालान पेश कर दिया है और पीड़ितों को आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया भी जारी है।