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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक में आदिवासी समुदाय के सर्वांगीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में जनजातीय संस्कृति के संरक्षण से लेकर दूरस्थ इलाकों में योजनाओं के विस्तार तक व्यापक चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर, जो भौगोलिक रूप से केरल से भी बड़ा क्षेत्र है, लंबे समय तक विकास से वंचित रहा, लेकिन अब वहां विकास की नई धारा स्थापित हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि दूरस्थ आदिवासी अंचलों तक शासन की योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचे।
बैठक में देवगुड़ी और सरना स्थलों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने जनजातीय धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों पर अवैध अतिक्रमण रोकने के लिए कड़े कदम उठाने को कहा। उन्होंने बताया कि “धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना” के तहत प्रदेश के 6600 गांवों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है, जबकि पीएम जनमन योजना के अंतर्गत 32 हजार आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं।
“नियद नेल्ला नार योजना” की सफलता पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने “नियद नेल्ला नार 2.0” को जल्द लागू करने की घोषणा की। इस योजना के माध्यम से सुदूर गांवों में बिजली, पानी, सड़क और राशन जैसी मूलभूत सुविधाओं का और विस्तार किया जाएगा। वहीं “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना” के तहत अब तक 36 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच का कार्य जारी है।

मुख्यमंत्री ने जनजातीय भूमि के दीर्घकालीन लीज पर दोहन के मामलों की जांच कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही कोरवा और संसारी उरांव जातियों को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने के प्रस्ताव को जल्द केंद्र सरकार को भेजने को कहा गया।
शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए छात्रावासों में सीट वृद्धि, रखरखाव और शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। नक्सल मुक्त क्षेत्रों में बच्चों के लिए त्वरित शिक्षण व्यवस्था विकसित करने और खुले में कक्षाएं संचालित नहीं करने के निर्देश भी दिए गए।
अंबिकापुर नेशनल हाईवे के निर्माण में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही बारिश के दौरान कटने वाले मार्गों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी इलाकों में लंबे समय तक नक्सलवाद विकास की सबसे बड़ी बाधा रहा, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं और योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचने लगा है। उन्होंने कहा कि अब आदिवासी समाज तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है।
बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वन मंत्री केदार कश्यप, विभिन्न विकास प्राधिकरणों के पदाधिकारी, विधायक, मुख्य सचिव और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।