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रायपुर। राजधानी रायपुर के नवा रायपुर स्थित आईआईएम में आयोजित 'चिंतन शिविर 3.0' के पहले दिन नेतृत्व, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कृषि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन हुआ। शिविर में आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित मंत्रिमंडल के सदस्यों को प्रभावी और संवेदनशील नेतृत्व का मंत्र दिया।
उन्होंने कहा कि एक सच्चा नेता हमेशा यह याद रखे कि वह संवेदनशील मनुष्यों का नेतृत्व करता है, मशीनों का नहीं। नेतृत्व का उद्देश्य केवल आदेश देना नहीं, बल्कि लोगों के विकास का मार्ग प्रशस्त करना है। हर निर्णय में मानवीय संवेदना, सेवा-भाव और नैतिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
विश्वास, करुणा और जिम्मेदारी से बनता है नेतृत्व
गौर गोपाल दास ने अपने संबोधन में कहा कि प्रभावी नेतृत्व का आधार अधिकार नहीं, बल्कि विश्वास, करुणा और जिम्मेदारी है। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि कठिन परिस्थितियों में शांत रहकर सही प्राथमिकताएं तय करना ही सफल नेतृत्व की पहचान है। अनियंत्रित परिस्थितियों पर चिंता करने के बजाय अपने कार्य और जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
उन्होंने भगवान राम के बालकांड का उल्लेख करते हुए राजा दशरथ के आठ मंत्रियों के गुणों का उदाहरण दिया और बताया कि एक आदर्श मंत्रिमंडल कैसा होना चाहिए।
सीएम साय बोले- शिविर से बनेगी आगे की कार्ययोजना
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि चिंतन शिविर का उद्देश्य शासन को अधिक प्रभावी, आधुनिक, पारदर्शी और जनहितैषी बनाना है। उन्होंने कहा कि शिविर में मिले सुझावों और विचार-विमर्श के आधार पर आने वाले समय की कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिससे विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को गति मिलेगी।
शिविर के पहले दिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे। विशेषज्ञों ने बताया कि केवल उर्वरकों के अधिक उपयोग से उत्पादन नहीं बढ़ता, बल्कि इससे मिट्टी की गुणवत्ता और प्राकृतिक इकोसिस्टम भी प्रभावित होता है। टिकाऊ कृषि और आधुनिक तकनीक के संतुलित उपयोग पर विशेष जोर दिया गया।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि चिंतन शिविर का अनुभव उनके लिए नया और प्रेरणादायक रहा। उन्होंने कहा कि पहले सत्र में कृषि और पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई, जबकि दूसरे सत्र में गौर गोपाल दास ने आदर्श नेतृत्व, निर्णय क्षमता और जनसेवा को लेकर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया।
उन्होंने कहा कि यदि वर्ष 2030 तक भारत दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होना चाहता है, तो केवल तकनीक नहीं, बल्कि सेवा भाव, संवेदनशीलता और बेहतर नेतृत्व भी उतना ही आवश्यक होगा।
चिंतन शिविर के दूसरे दिन पर्यटन, नीति निर्माण और सुशासन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी। सरकार का उद्देश्य विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाना है।