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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CSMCL ओवरटाइम भुगतान घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी मैनपावर एजेंसियों से जुड़े संचालक और प्रतिनिधि हैं। सोमवार को विशेष न्यायालय में पेशी के बाद सभी को 11 मई 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच ओवरटाइम भुगतान के नाम पर करीब 115 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। यह राशि कर्मचारियों को अतिरिक्त कार्य के बदले दी जानी थी, लेकिन प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फर्जी और बढ़े हुए बिलों के जरिए रकम निकाली गई।
EOW/ACB की जांच में खुलासा हुआ है कि इस राशि का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों तक पहुंचने के बजाय अधिकारियों और निजी व्यक्तियों को कमीशन देने में इस्तेमाल किया गया। साथ ही मैनपावर कंपनियों द्वारा बड़ी रकम खुद रखने के भी संकेत मिले हैं।
एजेंसी के अनुसार, ओवरटाइम के नाम पर प्रस्तुत किए गए बिलों में कर्मचारियों की उपस्थिति, कार्य विवरण और भुगतान संबंधी आंकड़ों में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि पूरे मामले को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों में नीरज कुमार चौधरी (सीए व सलाहकार), अजय लोहिया, अजीत दरंदले, अमित प्रभाकर सालुंके, अमित मित्तल, राजीव द्विवेदी और संजीव जैन शामिल हैं। सभी अलग-अलग मैनपावर कंपनियों से जुड़े हैं।
इस घोटाले की शुरुआत 29 नवंबर 2023 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई से हुई थी, जिसमें 28.80 लाख रुपये नकद जब्त किए गए थे। इसके बाद राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजी गई और EOW/ACB में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से फर्जी बिलिंग, कमीशन नेटवर्क और रकम के उपयोग को लेकर गहन पूछताछ की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इस संगठित आर्थिक अपराध में और भी लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है।
EOW/ACB ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी है और अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।