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cyber fraud network busted ed raids 20 states
नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) को साइबर धोखाधड़ी की रकम ठिकाने लगाने वाले एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने में बड़ी सफलता मिली है। यह नेटवर्क देश के 20 राज्यों में फैला हुआ था।
ईडी ने 17 जुलाई को गोवा और मुंबई में 20 स्थानों पर और उसके बाद 21 अगस्त को फिर से 21 स्थानों पर छापे मारे। कार्रवाई के दौरान 3.25 करोड़ रुपये की नकदी के साथ-साथ कई डिजिटल उपकरण और कंपनियों के रजिस्ट्रार आदि बरामद किए गए हैं। गोवा से दो आरोपियों (फहीम मोइन हुसैन सैयद और नइम मोइन सैयद) को गिरफ्तार किया गया है।
ईडी के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़ी कंपनियों की जांच में 27,850 करोड़ रुपये के बैंकिंग ट्रांजैक्शन के सबूत मिले हैं। इन कंपनियों के बैंक खातों में 2,904 करोड़ रुपये नकद जमा किए गए थे, जिनमें से 585 करोड़ रुपये अलग-अलग स्थानों पर लगी 61,448 बल्क नोट एक्सेप्टेंस मशीन के जरिए जमा कराए गए थे।
धोखाधड़ी की रकम को एक घंटे के भीतर 400 से अधिक बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया जाता था और अंततः उसे विदेश भेजा जाता था। इस काम में आरबीआई से लाइसेंस प्राप्त कई मनी चेंजर्स कंपनियां, कमोडिटी, ट्रेडिंग, ट्रैवल और फॉरेक्स में काम करने वाली कंपनियां शामिल थीं जो आपस में एक-दूसरे से जुड़ी हुई थीं।
20 राज्यों में साइबर धोखाधड़ी के 330 पीड़ितों की शिकायत और 163 एफआईआर में इस नेटवर्क से जुड़ी कंपनियों की संलिप्तता के सबूत मिले हैं, जिनमें धोखाधड़ी की कुल रकम 417 करोड़ रुपये से ज्यादा है।
इस पूरे नेटवर्क का खुलासा गोवा की एक महिला के साथ हुई ठगी से हुआ। पिछले साल जून में 11 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर महिला से 2 करोड़ 60 लाख की ठगी की गई थी, जिसे 'सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट' के नाम पर जमा कराया गया था। जांच में पता चला कि पीड़िता के खाते में पैसे मिलते ही उसे एक घंटे के भीतर इस नेटवर्क के 400 से अधिक बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया गया था।
अन्य मामला: सॉफ्टवेयर से लिंक भेजकर आईफोन धारकों को ठगा
दिल्ली के रोहिणी के दीप विहार में एप्पल केयर के नाम पर चल रहे कॉल सेंटर पर छापा मारकर हैदराबाद निवासी गिरोह के सरगना विष्णु सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
यह गिरोह सबसे सुरक्षित माने जाने वाले एप्पल के आईफोन इस्तेमाल करने वाले लगभग 800 लोगों को ठग चुका है।
ये लोग 'एक्स-लाइट' सॉफ्टवेयर के जरिए फोन पर मैसेज भेजते थे, जिस पर क्लिक करने पर फोन कुछ देर के लिए हैक हो जाता था और ठग लोगों के खाते से रुपये उड़ा लेते थे।
प्राथमिक जांच में इन लोगों से तीन से चार करोड़ रुपये ठगे जाने की बात सामने आई है, जो कई करोड़ तक पहुंचने की आशंका है।