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रायपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के लिए एक बेहद राहत और बड़ी खुशखबरी सामने आई है। दशकों के लंबे इंतजार के बाद 'दल्ली राजहरा-रावघाट रेल परियोजना' अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, रेल लाइन को अब अंतिम छोर यानी रावघाट तक सफलतापूर्वक जोड़ दिया गया है। आगामी 15 से 20 दिनों के भीतर इस रूट पर मालगाड़ी (Goods Train) का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा, जबकि अगले 3 महीनों में क्षेत्रवासियों को पैसेंजर ट्रेन की सौगात मिलने की पूरी उम्मीद है।
बता दें कि इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना को साल 1998-99 में मंजूरी दी गई थी। बस्तर का यह इलाका घने जंगलों, पहाड़ों और गंभीर नक्सली समस्या से घिरा होने के कारण लंबे समय तक इस परियोजना का काम बेहद धीमा रहा। दुर्गम परिस्थितियों में रेल लाइन बिछाना रेलवे के लिए एक बड़ी चुनौती था। लेकिन हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों की मजबूत तैनाती और बस्तर में सुधरते हालातों के चलते इस रिमोट एरिया में काम ने रफ्तार पकड़ी और आज यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है।
रायपुर रेल मंडल के सीनियर डीसीएम अवधेश कुमार त्रिवेदी ने बताया “रेलवे ने इस ट्रैक का फिटनेस सर्टिफिकेट हासिल कर लिया है और सीआरएस (CRS) की अंतिम मंजूरी के लिए आवेदन भेज दिया गया है। अगले 15 से 20 दिनों में रावघाट तक गुड्स ट्रेन का परिचालन शुरू हो जाएगा।”
वर्तमान में लौह अयस्क (Iron Ore) के परिवहन के लिए ट्रकों को लगभग 230 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। ट्रेन शुरू होने से प्रति ट्रिप करीब 170 किलोमीटर की सीधी बचत होगी। भारी वाहनों की आवाजाही कम होने से सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव घटेगा। परिवहन दूरी घटने से डीजल की भारी बचत होगी और लॉजिस्टिक्स खर्च में बड़ी कमी आएगी।
वर्तमान में इस परियोजना के तहत ताड़ोकी तक पैसेंजर ट्रेन पहले से ही चलाई जा रही है, जिसे अगले 3 महीने में रावघाट तक बढ़ा दिया जाएगा। इसके साथ ही, रेलवे ने आगे की कड़ियों को जोड़ने की तैयारी भी पूरी कर ली है। रावघाट से जगदलपुर तक के लगभग 140 किलोमीटर लंबे अगले चरण की रेल लाइन परियोजना को भी मंजूरी मिल चुकी है। इसे तीन चरणों में पूरा किया जाएगा, जिसके लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। रेलवे अधिकारियों का दावा है कि अगले 5 वर्षों में यह काम पूरा कर लिया जाएगा और साल 2030 तक जगदलपुर के नागरिकों को भी इस सीधे रेल सेवा का लाभ मिलने लगेगा।