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इंदौर। मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला मामले में शुक्रवार को इंदौर हाई कोर्ट ने एक युगांतरकारी फैसला सुनाया है। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया है कि भोजशाला मूल रूप से वाग्देवी (मां सरस्वती) का मंदिर और प्राचीन संस्कृत शिक्षा केंद्र था। हाई कोर्ट ने यह फैसला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट, ऐतिहासिक तथ्यों और पुख्ता पुरातात्विक साक्ष्यों को आधार बनाकर दिया है।
इस बड़े फैसले के बाद धार सहित पूरे क्षेत्र में प्रशासन अलर्ट मोड पर है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
भोजशाला परिसर की जांच के दौरान ASI ने एक बंद कमरे का ताला खोलकर उसका सर्वे किया था। इस बंद कमरे से मिले अवशेषों ने हिंदू पक्ष के दावों को सबसे ज्यादा मजबूती दी। कमरे के भीतर से कई अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक मूर्तियां बरामद हुईं, जिनमें शामिल हैं-
भगवान गणेश की प्रतिमा
महिषासुर मर्दिनी स्वरूप में मां भगवती की मूर्ति
हनुमान जी की प्रतिमा
अन्य देवी-देवताओं के प्राचीन विग्रह।
इन मूर्तियों की खोज ने इस बात को पूरी तरह पुख्ता कर दिया कि प्राचीन समय में यह परिसर एक भव्य हिंदू मंदिर था।
ASI ने वर्ष 2024 में 98 दिनों तक चले गहन वैज्ञानिक सर्वे के बाद इंदौर हाई कोर्ट में 2100 पन्नों की एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी। इस रिपोर्ट में खुदाई और सर्वे के दौरान परिसर से कमल और शंख जैसे पवित्र हिंदू धार्मिक प्रतीक मिले। परमारकालीन (राजा भोज के समय) भवन की मूल नींव पर ही बाद के कालखंड में अन्य निर्माण किए गए। | परिसर में मौजूद स्तंभों, शिलालेखों और वास्तुशिल्पीय संरचनाओं से संकेत मिलता है कि बाद के निर्माणों में मंदिर के ही मूल तत्वों का दोबारा इस्तेमाल किया गया था। |
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि निर्णय लेते समय ASI की इसी वैज्ञानिक रिपोर्ट, ऐतिहासिक दस्तावेजों और अयोध्या मामले में स्थापित कानूनी सिद्धांतों को मुख्य आधार बनाया गया है।
हाई कोर्ट ने कहा कि ऐतिहासिक, पुरातात्विक महत्व और धार्मिक आस्था से जुड़े ऐसे स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सीधी जिम्मेदारी है। अदालत ने गर्भगृह और वहां की धार्मिक महत्व की प्रतिमाओं के अनिवार्य संरक्षण के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने अपने इस फैसले से वर्ष 2003 के उन पुराने आदेशों को पूरी तरह रद्द कर दिया है, जिसके तहत हिंदू पक्ष को नियमित पूजा का अधिकार नहीं था और मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक भूमि के लिए सरकार से संपर्क करने का सुझाव दिया है। अब भोजशाला के प्रबंधन और इसके भविष्य के उपयोग को लेकर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार और ASI की गाइडलाइंस पर छोड़ दिया गया है। फैसले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बना दिया है।
पुलिस अधीक्षक (SP) सचिन शर्मा ने सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा करते हुए रिजर्व पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को भी चौबीसों घंटे अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।
यह पूरा मामला साल 2022 में दायर एक याचिका के बाद गरमाया था। इस याचिका में भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने, नियमित पूजा की अनुमति देने, एक विशेष ट्रस्ट का गठन करने और ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग की गई थी।
अदालत में 12 मई तक चली लंबी बहस के दौरान हिंदू पक्ष के अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने परमार राजा भोज के प्रसिद्ध ग्रंथ 'समरांगण सूत्रधार' का हवाला देते हुए साबित किया था कि भोजशाला की वास्तुकला प्राचीन मंदिर निर्माण के तय मानकों से पूरी तरह मेल खाती है। अब हाई कोर्ट के इस अंतिम फैसले के बाद सबकी नजरें केंद्र सरकार और ASI के अगले प्रशासनिक कदमों पर टिकी हैं।