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छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला में आयोजित बागेश्वर धाम की कथा इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के सान्निध्य में चल रही इस धार्मिक सभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कथा के दौरान ‘घर वापसी’ को लेकर भी दावा किया गया है, जिसमें सैकड़ों लोगों के सनातन धर्म अपनाने की बात कही गई।
कथा के दौरान यह दावा किया गया कि लगभग 583 लोगों ने ‘घर वापसी’ की है। इनमें एक मुस्लिम परिवार के शामिल होने की भी बात सामने आई है, जिन्होंने सनातन धर्म अपनाया। आयोजन समिति के अनुसार, ये लोग पहले अन्य धर्मों में चले गए थे और अब पुनः हिंदू धर्म में लौटे हैं।
कोरबा के ढपढप क्षेत्र में चल रही 5 दिवसीय हनुमंत कथा के चौथे दिन भारी भीड़ देखने को मिली। आयोजकों के मुताबिक, इस दिन करीब 2 लाख से अधिक श्रद्धालु कथा और दिव्य दरबार में शामिल हुए। पंडाल में महिलाओं और पुरुषों को भक्ति में झूमते और नाचते हुए देखा गया।
कथा के दौरान लगे दिव्य दरबार में कई लोगों के ‘भूत-प्रेत बाधा’ से मुक्ति का दावा किया गया। पंडित धीरेंद्र शास्त्री द्वारा मंत्रोच्चार और ‘पर्चा’ लिखकर समस्याओं का समाधान करने की बात कही गई। इसी दौरान कुछ श्रद्धालु असामान्य व्यवहार करते नजर आए—कोई जमीन पर लोटता दिखा तो कोई झूमते हुए दिखाई दिया।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने अपने प्रवचन में धर्मांतरण के मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब तक वे जीवित हैं, हिंदुओं को “न कटने देंगे, न बंटने देंगे और न मिटने देंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग लालच में आकर धर्म बदल चुके हैं, वे अब वापस लौट रहे हैं।
इसके अलावा उन्होंने धर्मांतरण कराने वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि यह “खेल अब नहीं चलेगा।” अपने बयान में उन्होंने “हालेलुया वालों” पर भी टिप्पणी की, जिसे लेकर चर्चा तेज हो गई है।
कार्यक्रम के दौरान एक भावुक क्षण भी देखने को मिला, जब एक गरीब बुजुर्ग ने अपनी आर्थिक स्थिति बताई। वह पाली मुनगाडीह से पैदल चलकर कथा में पहुंचे थे।
इस पर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने तुरंत 50 हजार रुपये की सहायता दी और उपस्थित लोगों से भी मदद करने की अपील की। इसके बाद कुल 1.20 लाख रुपये की राशि बुजुर्ग को दी गई। साथ ही उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाने की व्यवस्था भी कराई गई।
कथा के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने समाज में जरूरतमंदों की मदद करने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि लोग मनोरंजन पर तो खर्च करते हैं, लेकिन गरीबों की सहायता के लिए भी आगे आना चाहिए।
कोरबा में चल रही यह कथा धार्मिक आस्था, सामाजिक संदेश और विवादित बयानों के कारण लगातार सुर्खियों में बनी हुई है।