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अंबिकापुर। बलरामपुर जिले के ग्राम महाराजगंज निवासी रामजीत राम (35) की मौत एक कुत्ते के काटने के पांच महीने बाद हो गई। रामजीत राम ने कुत्ते के काटने के तुरंत बाद चिकित्सकीय उपचार नहीं कराया और जड़ी-बूटी के भरोसे इलाज करते रहे। घटना के दौरान परिवार के कुछ ही सदस्यों को इसकी जानकारी थी।
जानकारी के अनुसार, रामजीत राम को लगभग पांच माह पहले गांव की गली में एक कुत्ते ने काट लिया था। कुत्ते के काटने के बाद घाव की साफ-सफाई, चिकित्सकीय जांच और एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाना जरूरी होता है, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके बजाय केवल पारंपरिक घरेलू उपचार और जड़ी-बूटी पर भरोसा किया।
कुछ दिनों से उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और शनिवार को अचानक हालत गंभीर हो गई। तेज बुखार और उल्टियों के बाद उन्हें जिला अस्पताल बलरामपुर लाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्रारंभिक उपचार के बाद उन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल रिफर कर दिया। रविवार को वहां उनकी मौत हो गई।
चिकित्सकों ने बताया कि कुत्ता, बंदर या अन्य संक्रमित जानवर के काटने के बाद एंटी रैबीज वैक्सीन समय पर लगवाना जीवनरक्षक होता है। केवल घरेलू उपचार या जड़ी-बूटी पर भरोसा खतरनाक हो सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग कुत्ते के काटने की घटना को मामूली समझते हैं या पारंपरिक उपचार पर भरोसा करते हैं, जिससे गंभीर संक्रमण और मौत का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विभाग को गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचने की सलाह देने की आवश्यकता है।