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दुर्ग। निर्माणाधीन मकान में ईंटों के बीच छिपाकर रखे गए विस्फोटक पदार्थ के मामले में दुर्ग की विशेष एनडीपीएस कोर्ट ने आरोपी विजय पटेल को दोषी ठहराते हुए 10 साल के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने माना कि आरोपी ने बिना वैध लाइसेंस के विस्फोटक पदार्थ अपने कब्जे में रखा था।
मामला 14 सितंबर 2020 का है। नंदिनी थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि नंदिनी खुंदनी निवासी विजय पटेल के निर्माणाधीन मकान में अवैध रूप से विस्फोटक पदार्थ छिपाकर रखा गया है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर दबिश दी और तलाशी की कार्रवाई की।
ईंटों के बीच मिली विस्फोटक सामग्री
पुलिस के मुताबिक तलाशी के दौरान मकान में ईंटों के बीच एक थैले में 40 नग जिलेटिन बरामद किए गए थे। पुलिस ने इनकी जब्ती की और बरामद सामग्री को जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) भेजा गया।
FSL की जांच रिपोर्ट में जब्त नमूने में अमोनियम नाइट्रेट पाए जाने की पुष्टि हुई। कुल बरामद अमोनियम नाइट्रेट की मात्रा 5.148 किलोग्राम बताई गई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विस्फोटक पदार्थ से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
दो गवाहों ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन नहीं किया
मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस ने झूमर जैन और नारायण देवांगन को गवाह के तौर पर पेश किया। हालांकि, दोनों स्वतंत्र गवाहों ने अदालत में अभियोजन का समर्थन नहीं किया। उन्होंने पुलिस के सामने हुई कार्रवाई से खुद को अलग बताया और कहा कि वे आरोपी को पहचानते तक नहीं हैं। उनके सामने कोई जब्ती होने की बात से भी उन्होंने इनकार किया।
इसके बावजूद अदालत ने केवल इस आधार पर पुलिस की कार्रवाई और साक्ष्यों को खारिज नहीं किया।
कोर्ट ने कहा- पुलिस अधिकारियों की गवाही को सिर्फ इसलिए नहीं नकार सकते
मामले में बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क भी दिया गया कि पुलिस ने जब्ती की कार्रवाई से पहले अपने वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति नहीं ली थी। अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
विशेष न्यायाधीश सुनीता टोप्पो ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस अधिकारियों की गवाही को सिर्फ इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता कि वे पुलिस विभाग से जुड़े हैं। हालांकि, उनके साक्ष्यों की सावधानीपूर्वक जांच जरूरी है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि विस्फोटक पदार्थ अधिनियम में जब्ती की कार्रवाई से पहले वरिष्ठ अधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य होने का कोई प्रावधान नहीं है।
10 साल की सजा और 5 हजार रुपए जुर्माना
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, पुलिस की कार्रवाई और FSL रिपोर्ट को महत्वपूर्ण मानते हुए विजय पटेल को दोषी ठहराया। कोर्ट ने आरोपी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 5,000 रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि निर्माणाधीन मकान में बड़ी संख्या में जिलेटिन की छड़ें और अमोनियम नाइट्रेट जैसे विस्फोटक पदार्थ छिपाकर रखे गए थे। कोर्ट के फैसले के बाद बिना वैध लाइसेंस विस्फोटक सामग्री रखने के मामलों में पुलिस कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में है।