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gautam singh ayam dismissed bribery case chhattisgarh education department
बलरामपुर-रामानुजगंज। भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाए गए शिक्षा विभाग के सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी गौतम सिंह आयम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए जाने और बाद में न्यायालय द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराए जाने के बाद शिक्षा विभाग ने उन्हें शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई रिश्वतखोरी के मामले में न्यायालय के फैसले के बाद की गई है।

गौतम सिंह आयम सहायक ग्रेड-2 के पद पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय वाड्रफनगर में संलग्न थे। उनकी मूल पदस्थापना शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय इंजानी, विकासखंड वाड्रफनगर में थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने एरियर्स भुगतान के एवज में आवेदक से रिश्वत की मांग की थी।
13 अगस्त 2024 को ACB ने किया था गिरफ्तार
मामले के अनुसार, 13 अगस्त 2024 को एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर की टीम ने कार्रवाई करते हुए गौतम सिंह आयम को 12 हजार रुपये की रिश्वत राशि स्वीकार करते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। कार्रवाई एरियर्स भुगतान से जुड़े मामले में की गई थी।
गिरफ्तारी के बाद ACB ने आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया। न्यायालय के आदेश के बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल रामानुजगंज भेज दिया गया था। भ्रष्टाचार के आरोप में हुई इस गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई।
48 घंटे से अधिक जेल में रहने पर हुए निलंबित
सरकारी सेवा में रहते हुए किसी कर्मचारी के 48 घंटे से अधिक समय तक न्यायिक अभिरक्षा में रहने की स्थिति में नियमानुसार निलंबन की कार्रवाई की जाती है। इसी प्रावधान के तहत गौतम सिंह आयम को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।
कलेक्टर, बलरामपुर-रामानुजगंज के आदेश के बाद उनका निलंबन किया गया। इसके बाद रिश्वतखोरी से जुड़े आपराधिक प्रकरण में न्यायिक कार्रवाई आगे बढ़ती रही।
कोर्ट ने माना- रिश्वत की मांग और राशि स्वीकार की
मामले में विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), बलरामपुर स्थान रामानुजगंज की अदालत में सुनवाई हुई। न्यायालय के 15 मई 2026 के फैसले की प्रमाणित प्रति विकासखंड शिक्षा अधिकारी, वाड्रफनगर के माध्यम से शिक्षा विभाग को प्राप्त हुई।
न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर माना कि गौतम सिंह आयम ने अपने लोक कर्तव्य के पालन के बदले अनुचित लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से प्रार्थी नितेश रंजन पटेल से एरियर्स भुगतान के लिए 20 हजार रुपये की मांग की थी। इसके बाद 12 हजार रुपये की रिश्वत राशि स्वीकार की गई।
अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और पूरे प्रकरण की सुनवाई के बाद न्यायालय ने आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 में संशोधित अधिनियम 2018 की धारा 7 के तहत दोषी ठहराया।
कोर्ट ने सुनाई 3 साल की सजा
भ्रष्टाचार के मामले में दोष सिद्ध होने के बाद विशेष न्यायालय ने गौतम सिंह आयम को 3 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने उन पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
न्यायालय के इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग ने मामले से संबंधित सभी दस्तावेजों और न्यायालय के निर्णय का परीक्षण किया। इसके बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया।
अब सरकारी नौकरी से भी बर्खास्त
न्यायालय से भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद शिक्षा विभाग ने गौतम सिंह आयम के खिलाफ अंतिम विभागीय कार्रवाई की है। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार उन्हें शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
इस कार्रवाई के साथ ही रिश्वतखोरी के मामले में उनके खिलाफ विभागीय स्तर पर भी कड़ी कार्रवाई पूरी हो गई है। यानी पहले ACB की कार्रवाई में गिरफ्तारी, इसके बाद न्यायिक अभिरक्षा और निलंबन, फिर अदालत से दोषसिद्धि और सजा के बाद अब उन्हें सरकारी सेवा से भी बाहर कर दिया गया है।
करीब दो साल बाद हुई अंतिम कार्रवाई
गौतम सिंह आयम की गिरफ्तारी 13 अगस्त 2024 को हुई थी, जबकि विशेष न्यायालय ने 15 मई 2026 को उन्हें भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। अब न्यायालय के फैसले के आधार पर शिक्षा विभाग ने उनकी बर्खास्तगी का आदेश जारी किया है।
यह मामला सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी के खिलाफ चल रही कार्रवाई और दोष सिद्ध होने के बाद सरकारी कर्मचारियों पर होने वाली विभागीय कार्रवाई का उदाहरण भी है। एरियर्स भुगतान जैसे शासकीय कार्य के लिए रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के मामले में न्यायालय की दोषसिद्धि के बाद शिक्षा विभाग ने सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई की है।