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नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा ने राज्यसभा में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था में हुए सुधार के बाद अब विकास की गति तेज करने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार से छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों के लिए विकास, पुनर्वास और रोजगार को एकीकृत रूप से आगे बढ़ाने वाली विशेष कार्ययोजना तैयार करने की मांग की है। साथ ही इन क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त केंद्रीय सहायता का प्रावधान करने का आग्रह किया।
सांसद लक्ष्मी वर्मा ने राज्यसभा में कहा कि छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा की स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। अब इन क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से तेजी से जोड़ना जरूरी है, ताकि सुरक्षा के क्षेत्र में हासिल उपलब्धियों को स्थायी और सर्वांगीण विकास में बदला जा सके।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के बाद विकास अगली प्राथमिकता
राज्यसभा में अपने वक्तव्य के दौरान लक्ष्मी वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री के नक्सलवाद को समाप्त कर प्रभावित क्षेत्रों में शांति, सुरक्षा और विकास स्थापित करने के संकल्प के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है। इसके चलते प्रदेश के अनेक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास का रास्ता खुला है।
उन्होंने कहा कि अब केवल नक्सलवाद के प्रभाव को कम करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिन क्षेत्रों में लंबे समय तक हिंसा और पिछड़ेपन का असर रहा है, वहां विकास की मजबूत और स्थायी नींव तैयार करना जरूरी है।
सांसद ने कहा कि सुरक्षा में सुधार से पैदा हुए सकारात्मक माहौल का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचना चाहिए और उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए।
सड़क, रेल और इंटरनेट कनेक्टिविटी पर विशेष जोर
लक्ष्मी वर्मा ने बस्तर संभाग के साथ-साथ सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और कांकेर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के तेजी से विस्तार की आवश्यकता बताई।
उन्होंने सड़क और रेल नेटवर्क को मजबूत करने के साथ-साथ इंटरनेट कनेक्टिविटी का विस्तार करने पर जोर दिया। उनका कहना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से इन क्षेत्रों के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने में मदद मिलेगी।
उन्होंने पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार की भी आवश्यकता बताई, ताकि नक्सल प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो सके।
आदिवासी युवाओं के लिए कौशल विकास और स्थानीय रोजगार
सांसद ने विशेष रूप से आदिवासी युवाओं के लिए कौशल विकास और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने से युवाओं का पलायन कम करने और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में भी मदद मिलेगी। इसके साथ ही स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा सकता है।
केंद्र से विशेष पैकेज और एकीकृत कार्ययोजना की मांग
राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा ने केंद्र सरकार से छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि विकास, पुनर्वास और रोजगार को अलग-अलग योजनाओं के बजाय एकीकृत तरीके से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
उन्होंने केंद्र से राज्य को अतिरिक्त केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराने का भी आग्रह किया, ताकि नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़क, रेल, शिक्षा, स्वास्थ्य, इंटरनेट, पेयजल और रोजगार से जुड़े प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा किया जा सके।
‘नक्सल-मुक्त’ से ‘विकसित और आत्मनिर्भर’ छत्तीसगढ़ तक
अपने वक्तव्य के अंत में लक्ष्मी वर्मा ने कहा कि नक्सल-मुक्त छत्तीसगढ़ का लक्ष्य केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे प्रदेश के विकसित और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के संकल्प से जोड़ने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा की स्थिति बेहतर होने के बाद अब वहां विकास की रफ्तार को नई गति देना समय की मांग है। यदि सुरक्षा, बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और रोजगार को एक साथ आगे बढ़ाया जाए तो इन क्षेत्रों को स्थायी रूप से विकास की मुख्यधारा में शामिल किया जा सकता है।
इस तरह राज्यसभा में लक्ष्मी वर्मा की मांग का केंद्रबिंदु यह रहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा उपलब्धियों को विकास की ठोस उपलब्धियों में बदला जाए और इसके लिए केंद्र तथा राज्य सरकार मिलकर विशेष रणनीति के तहत काम करें।