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मुंबई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने कहा है कि ज्ञान, कौशल और चरित्र—इन तीनों का समन्वय ही वास्तविक शिक्षा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित भारत का निर्माण केवल आर्थिक समृद्धि से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए संस्कारित, चरित्रवान, आत्मविश्वासी और उत्तरदायी नागरिकों की आवश्यकता होती है।
मुंबई में 'विकसित भारत हेतु शिक्षा' राष्ट्रीय संगोष्ठी में संबोधन
दत्तात्रेय होसबले ने शनिवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, मुंबई में 'शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास' एवं 'मुंबई विश्वविद्यालय' के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित "विकसित भारत हेतु शिक्षा" विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए ये विचार व्यक्त किए।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा, विकसित भारत एक पड़ाव है: उन्होंने कहा कि 'विकसित भारत 2047' एक पड़ाव मात्र है, और इसके प्राप्त होने के बाद यात्रा रुक जाएगी, ऐसा बिल्कुल नहीं है। हर नीति काल विशेष के लिए होती है, इसलिए हमें अपने मूल को छोड़े बिना समयानुसार उसमें बदलाव भी करना होगा।
संवादहीनता दूर करने पर जोर: उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि वर्तमान समय में संवादहीनता बढ़ गई है, जिसे हमें पुन: स्थापित करने की जरूरत है।
नई पीढ़ी के अनुकूल शिक्षा पद्धति: होसबले ने कहा कि हमने जो और जैसे सीखा है, आज की पीढ़ी को बिल्कुल वैसे ही नहीं सिखाया जा सकता। हमें उनके स्वभाव और आधुनिक जरूरतों के अनुसार शिक्षण पद्धति बनानी होगी, क्योंकि हम विद्यार्थियों को 'फैक्ट्री' के उत्पाद की तरह तैयार नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनका सर्वांगीण विकास कर रहे हैं।