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मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के संकेतों के बीच वैश्विक तेल बाजार में बड़ी राहत देखने को मिली है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को एक बार फिर कॉमर्शियल जहाजों के लिए पूरी तरह खोलने के ऐलान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार 17 अप्रैल को ब्रेंट क्रूड का भाव लगभग 13 डॉलर टूटकर 86 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। इससे पहले गुरुवार को इसकी कीमत 99.39 डॉलर प्रति बैरल पर थी।
युद्ध शुरू होने से पहले 28 फरवरी को कच्चे तेल की कीमत 73 डॉलर प्रति बैरल थी, लेकिन क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ने के बाद 9 मार्च को यह 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। तेल की कीमतों में तेजी के कारण दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल महंगा होने की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं।
ईरान के ऐलान से बाजार में भरोसा लौटा
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि इजराइल और लेबनान के बीच युद्धविराम की दिशा में सकारात्मक प्रगति के बाद होर्मुज रूट को सभी व्यापारिक जहाजों के लिए खोल दिया गया है। इस घोषणा के बाद निवेशकों का भरोसा लौटा और ग्लोबल बाजारों में तेजी देखी गई।
अमेरिकी शेयर बाजार में भी इसका असर दिखाई दिया। डाउ जोन्स लगभग 1,000 अंकों की तेजी के साथ 49,500 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं S&P 500 में 1.12 प्रतिशत और नैस्डैक में 1.04 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
ट्रम्प का बयान भी बना राहत का कारण
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान ने भविष्य में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद न करने की सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि इस मार्ग का इस्तेमाल अब दुनिया के खिलाफ दबाव के हथियार के रूप में नहीं किया जाएगा। ट्रम्प ने यह भी संकेत दिए कि मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव जल्द कम हो सकता है।
भारत को मिल सकती है बड़ी राहत
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। तेल सस्ता होने से भारत को कई स्तर पर राहत मिल सकती है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर:
तेल सस्ता होने से सरकारी तेल कंपनियों जैसे IOC, BPCL और HPCL पर कीमतें बढ़ाने का दबाव कम होगा। इससे आम लोगों को राहत मिल सकती है।
महंगाई पर नियंत्रण:
डीजल महंगा नहीं होने से ट्रांसपोर्ट लागत नहीं बढ़ेगी, जिससे खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें स्थिर रह सकती हैं।
करंट अकाउंट डेफिसिट में सुधार:
आयात बिल कम होने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश का करंट अकाउंट डेफिसिट घट सकता है।
रुपये को मजबूती:
तेल खरीदने के लिए डॉलर की मांग घटेगी, जिससे भारतीय रुपये को मजबूती मिल सकती है।
सरकार का बोझ घटेगा:
एलपीजी और अन्य ऊर्जा सब्सिडी पर सरकार का खर्च कम हो सकता है।
विशेषज्ञों का अनुमान
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक यदि कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल की कमी आती है, तो भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट में 9 से 10 अरब डॉलर तक की कमी आ सकती है। इसके साथ ही खुदरा महंगाई दर में लगभग 0.5 प्रतिशत तक राहत मिलने की संभावना रहती है।
होर्मुज रूट क्यों है इतना अहम
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग माना जाता है। दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। जब यह मार्ग प्रभावित हुआ था तब तेल, एलपीजी, उर्वरक, प्लास्टिक और एल्युमीनियम जैसे उत्पादों की कीमतों में तेजी देखी गई थी। शिपिंग लागत बढ़ने से यूरोप और ब्रिटेन में जरूरी सामानों की आपूर्ति प्रभावित होने लगी थी।
अब इस रूट के दोबारा खुलने से उम्मीद की जा रही है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौटेगी और कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं को राहत मिलेगी।
वैश्विक बाजार में सकारात्मक संकेत
ING के विश्लेषकों के अनुसार, युद्ध के कारण प्रतिदिन लगभग 1.3 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही थी। वैकल्पिक मार्गों के इस्तेमाल के बावजूद बाजार पर दबाव बना हुआ था। अब होर्मुज रूट के खुलने से आपूर्ति सामान्य होने की संभावना है और ऊर्जा बाजार में घबराहट कम हो सकती है।