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बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के चर्चित आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों का मामला अब बिलासपुर उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) पहुंच गया है। पीड़िता ने अपने अधिवक्ता अभिषेक पांडेय के माध्यम से कोर्ट में रिट याचिका दायर कर मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच पुलिस अधिकारियों से न कराकर किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से कराई जाए।
जांच अधिकारियों की नियुक्ति पर गंभीर आपत्तियां
याचिका में मामले की जांच प्रक्रिया और अधिकारियों की नियुक्ति पर कड़े सवाल उठाए गए हैं। पीड़िता का तर्क है कि इस मामले की शुरुआती जांच तत्कालीन आईजी आनंद छाबड़ा और तत्कालीन डीआईजी मिलना कुर्रे को सौंपी गई थी, जो निष्पक्ष नहीं हो सकती। याचिका में कहा गया है कि:
आनंद छाबड़ा और आरोपी आईपीएस रतनलाल डांगी समान रैंक के अधिकारी हैं, वहीं दूसरी जांच अधिकारी मिलना कुर्रे उनसे एक रैंक नीचे की अधिकारी हैं, इसलिए उन्हें इस मामले की जांच का अधिकार नहीं होना चाहिए।
इसके अलावा, आनंद छाबड़ा पर ऑनलाइन 'महादेव सट्टा ऐप' से जुड़े मामले के भी विचाराधीन होने का हवाला दिया गया है, जिसके चलते उनसे निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती।
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से जांच और संपत्ति की उच्चस्तरीय मांग
पीडि़ता ने अदालत से गुहार लगाई है कि मामले की जांच किसी वरिष्ठ महिला आईएएस अधिकारी को सौंपी जाए। इसके साथ ही, याचिका में मांग की गई है कि:
आईपीएस रतनलाल डांगी द्वारा छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बनाई गई कथित अवैध संपत्तियों की भी गहन जांच कराई जाए।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त किया जाए।
निलंबन में देरी पर हैरानी और अदालत से हस्तक्षेप की गुहार
याचिका में इस बात पर भी गहरी हैरानी जताई गई है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद राज्य सरकार द्वारा शुरू में तुरंत कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। पीड़िता ने न्याय की गुहार लगाते हुए अदालत से इस संवेदनशील मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है, और अब इस मामले पर अगले सप्ताह हाईकोर्ट में सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है।