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रायपुर — बहुचर्चित झीरम घाटी कांड को लेकर सरव आदिवासी समाज ने कड़ा रुख अपनाया है। समाज ने एनआईए (NIA) कोर्ट के हालिया फैसले पर गहरी आपत्ति जताते हुए इसे उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) में चुनौती देने का बड़ा निर्णय लिया है। समाज का स्पष्ट कहना है कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो इस मामले को न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट तक भी ले जाया जाएगा।
शुक्रवार को हुई अहम बैठक में लिए गए बड़े फैसले
जगदलपुर के परपा स्थित कोया समाज भवन में बस्तर संभाग के छह जिलों के प्रतिनिधियों और सजा पाए आरोपियों के परिजनों की एक महत्वपूर्ण बैठक करीब तीन घंटे तक चली। इस बैठक में मुख्य रूप से झीरम मामले की जांच, एनआईए कोर्ट के फैसले और आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों को मिल रहे पुनर्वास लाभों जैसे विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
कानूनी लड़ाई के लिए आर्थिक सहयोग: समाज ने निर्णय लिया है कि फैसले से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा कर हाईकोर्ट में अपील की जाएगी। इस कानूनी लड़ाई और खर्च को पूरा करने के लिए बस्तर संभाग के प्रत्येक आदिवासी परिवार से 20-20 रुपये का स्वैच्छिक सहयोग (चंदा) जुटाया जाएगा। सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने जानकारी दी कि बैठक में शामिल हुए 10 ग्रामीणों के परिजनों ने दावा किया कि उनके परिवार के सदस्य इस घटना में शामिल नहीं थे, बल्कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है।
मुख्य साजिश की दोबारा जांच की मांग: संगठन का कहना है कि 25 मई 2013 को हुई झीरम घाटी की घटना के पीछे एक कथित व्यापक साजिश थी, जिसकी दोबारा जांच होना बेहद जरूरी है ताकि घटना से जुड़े अनछुए पहलू सामने आ सकें।
अन्य प्रमुख मांगें: बैठक में लिए गए अन्य प्रमुख निर्णयों में झीरम मामले की साजिश और संदिग्धों की भूमिका का अध्ययन करना, सरकार व जांच एजेंसियों के सामने पुनः जांच की मांग रखना, आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों को मिलने वाले लाभों का पुनर्मूल्यांकन करना, तथा जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों की पैरवी के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजना शामिल है।
कांग्रेस भी आज बनाएगी झीरम मामले पर अपनी रणनीति
दूसरी ओर, झीरम मामले को लेकर राजधानी रायपुर स्थित राजीव भवन में प्रदेश कांग्रेस की एक अहम बैठक आयोजित की जा रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, टी.एस. सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू सहित कई वरिष्ठ नेता, झीरम के शहीदों के परिजन, घायल और विधि विशेषज्ञ शामिल होंगे।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब एनआईए की विशेष अदालत का फैसला आया है। ऐसे में कांग्रेस नेताओं और कानूनी विशेषज्ञों की मौजूदगी में इस फैसले के कानूनी पहलुओं और भविष्य की राजनीतिक व कानूनी रणनीति पर विस्तृत चर्चा होने की पूरी संभावना है।