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कांकेर। जिले के अंतागढ़ विकासखंड अंतर्गत बड़े तेवड़ा गांव में मतांतरण विवाद एक बार फिर चर्चा में है। ग्रामसभा ने पूर्व सरपंच रजमन सलाम सहित 14 मतांतरित व्यक्तियों के अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र निरस्त करने का प्रस्ताव पारित किया है। ग्रामसभा का निर्णय कलेक्टर को भेजा जाएगा और संबंधित प्रमाण पत्रों को रद्द करने की मांग की जाएगी।
ग्रामसभा में पारित प्रस्ताव के अनुसार संबंधित लोगों पर गोंड समुदाय की पारंपरिक रीति-रिवाज, धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक परंपराओं का त्याग कर ईसाई धर्म अपनाने का आरोप लगाया गया है। प्रस्ताव में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत गोंड समुदाय अनुसूचित जनजाति के रूप में अधिसूचित है, लेकिन मतांतरण के बाद संबंधित लोग जनजातीय परंपराओं का पालन नहीं कर रहे हैं।
प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित व्यक्ति जन्म, विवाह और मृत्यु संस्कार ईसाई पद्धति से संपन्न करते हैं तथा गोंड समाज के देवी-देवताओं और पारंपरिक पूजा-पद्धति को नहीं मानते। ग्रामसभा ने स्पष्ट किया कि ऐसे 14 लोगों को गोंड समुदाय की मान्यता नहीं दी जाएगी।
दिसंबर 2025 में हुआ था हिंसक विवाद
बड़े तेवड़ा गांव में मतांतरण का मुद्दा पिछले वर्ष दिसंबर में उस समय सुर्खियों में आया था, जब पूर्व सरपंच रजमन सलाम के पिता के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद और हिंसक प्रदर्शन हुआ था। घटना में प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिसकर्मियों सहित 30 से अधिक लोग घायल हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
ग्रामसभा के प्रस्ताव में मार्च 2026 में आए सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें कहा गया था कि मतांतरित व्यक्ति का अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का दर्जा उसके सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों के आधार पर निर्धारित किया जाएगा।
धर्म स्वतंत्र्य कानून का भी जिक्र
ग्रामसभा ने अप्रैल 2026 से लागू संशोधित छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्र्य कानून का हवाला देते हुए कहा कि अवैध मतांतरण के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान है। प्रस्ताव के अनुसार दोषी पाए जाने पर 10 से 20 वर्ष तक की सजा हो सकती है।
ग्रामसभा का यह प्रस्ताव अब प्रशासनिक स्तर पर जांच और निर्णय की प्रक्रिया के लिए कलेक्टर को भेजा जाएगा।