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Scope of CGPSC recruitment scam probe expanded; other recruitments now also on ED's radar.
रायपुर। राज्य लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) भर्ती परीक्षा 2021 घोटाले की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कार्रवाई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी मामले की गहन जांच में जुटा है। सूत्रों के अनुसार ईडी की जांच केवल 2021 की राज्य सेवा परीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में हुई अन्य भर्ती परीक्षाओं की भी विस्तृत जांच की जाएगी।
सहायक प्राध्यापक भर्ती भी जांच के घेरे में
जांच एजेंसियों के रडार पर अब वर्ष 2019 में 1,384 पदों पर हुई सहायक प्राध्यापक (असिस्टेंट प्रोफेसर) भर्ती भी आ गई है। इस भर्ती परीक्षा को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि एक ही परीक्षा केंद्र से शामिल हुए 50 अभ्यर्थियों में से 36 का चयन हो गया था। इस असामान्य चयन प्रक्रिया को लेकर जांच एजेंसियां दस्तावेजों और चयन प्रक्रिया की पड़ताल कर रही हैं।
संस्कृति विभाग की भर्ती पर भी सवाल
सूत्रों के मुताबिक संस्कृति विभाग में वर्ष 2023 के दौरान द्वितीय श्रेणी के पदों पर हुई भर्ती प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ गई है। इस भर्ती में अनियमितताओं, अपात्र उम्मीदवारों के चयन और नियमों के उल्लंघन की शिकायतें जांच एजेंसियों तक पहुंची हैं।
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल की भर्तियों पर फोकस
जानकारी के अनुसार ईडी और अन्य जांच एजेंसियां पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आयोजित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के रिकॉर्ड का परीक्षण कर रही हैं। यदि प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलते हैं तो अन्य भर्ती प्रक्रियाओं को भी जांच के दायरे में लाया जा सकता है।
भर्ती परीक्षाओं के आंकड़े भी जांच का हिस्सा
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भाजपा सरकार के दो कार्यकाल (2008-2018) के दौरान सीजीपीएससी के माध्यम से 90 परीक्षाएं आयोजित की गई थीं। वहीं, पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के पांच वर्षों के कार्यकाल में 78 भर्ती परीक्षाएं संपन्न हुईं। जांच एजेंसियां इन परीक्षाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं और शिकायतों का भी अध्ययन कर रही हैं।
आगे और बढ़ सकती है जांच की आंच
सूत्रों का दावा है कि यदि वर्तमान जांच में ठोस तथ्य सामने आते हैं तो पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में हुई अन्य भर्ती परीक्षाओं पर भी जांच एजेंसियों का शिकंजा कस सकता है। ऐसे में सीजीपीएससी भर्ती घोटाले की जांच आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकती है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर बढ़ी बहस
भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद प्रदेश में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर बहस तेज हो गई है। अभ्यर्थी और विभिन्न संगठन भी जांच की निष्पक्षता तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।