

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार
.jpg&w=3840&q=75)
Salaries of 273 teachers withheld for failing to join duty following rationalization; notices issued to 38 education officials.
बिलासपुर। प्रदेश में युक्तियुक्तकरण के बाद नई पदस्थापना वाले स्कूलों में समय पर कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई में ढिलाई बरतने पर लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने 273 शिक्षकों का वेतन रोकने के साथ ही कार्रवाई में लापरवाही बरतने वाले 5 संभागीय संयुक्त संचालकों (जेडी) और 33 जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
आदेशों की अनदेखी पर अधिकारियों से मांगा स्पष्टीकरण
संचालनालय ने कहा है कि कई बार निर्देश जारी होने के बावजूद अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित शिक्षकों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इसे अधिकारियों की जिम्मेदारियों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही मानते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम, 1965 के उल्लंघन की श्रेणी में रखा गया है।
नोटिस में पूछा गया है कि इस शिथिलता के लिए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।
तीन दिन में रिपोर्ट, सात दिन में देना होगा जवाब
डीपीआई ने निर्देश दिए हैं कि जिन शिक्षकों और व्याख्याताओं ने अब तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया है, उनके खिलाफ की गई कार्रवाई का प्रतिवेदन तीन दिनों के भीतर भेजा जाए। साथ ही आगे की विभागीय कार्रवाई के लिए आरोप पत्र, साक्ष्य और अन्य आवश्यक दस्तावेजों सहित विस्तृत प्रस्ताव भी प्रस्तुत करना होगा।
संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष रखने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। निर्धारित अवधि में जवाब नहीं मिलने पर मामला सीधे शासन को भेजा जाएगा।
सबसे ज्यादा प्राथमिक शिक्षक अनुपस्थित
विभागीय आंकड़ों के अनुसार युक्तियुक्तकरण के बाद भी 273 से अधिक शिक्षक नए पदस्थापना स्थल पर नहीं पहुंचे हैं। इनमें सबसे ज्यादा 134 प्राथमिक शिक्षक शामिल हैं।
इसके अलावा:
71 व्याख्याता
42 शिक्षक वर्ग-2
15 प्रधान पाठक
1 प्राचार्य
अब तक कार्यभार ग्रहण नहीं कर पाए हैं।
10 हजार से अधिक स्कूलों में किया गया था युक्तियुक्तकरण
राज्य सरकार ने स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 10,538 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया था। इस प्रक्रिया के तहत 16,165 शिक्षकों का समायोजन किया गया, ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर हो सके।
विभाग का मानना है कि पदस्थापना के बाद भी शिक्षकों का कार्यभार ग्रहण नहीं करना युक्तियुक्तकरण के मूल उद्देश्य को प्रभावित कर रहा है और इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है।
लापरवाही पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
लोक शिक्षण संचालनालय के डिप्टी डायरेक्टर अशोक बंजारा ने स्पष्ट किया है कि युक्तियुक्तकरण के बाद अब तक कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। साथ ही जिन अधिकारियों ने इस मामले में लापरवाही बरती है, उनसे तीन दिनों में कार्रवाई प्रतिवेदन और सात दिनों में जवाब मांगा गया है।
उन्होंने कहा कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।