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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में जहां अब तक और बड़े टेक शहरों का दबदबा माना जाता था, वहीं अब छत्तीसगढ़ की राजधानी ने वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना ली है। रायपुर के अधिवक्ता द्वारा विकसित GST आधारित AI बॉट आज भारत ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुका है।
यह ‘मेड इन रायपुर’ AI बॉट भारत के जटिल जीएसटी सिस्टम को सरल बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था, लेकिन आज इसकी पहुंच सात समंदर पार तक हो चुकी है। , और जैसे देशों के व्यापारी और लीगल फर्म अब भारतीय टैक्स नियमों को समझने के लिए इस देसी तकनीक का सहारा ले रहे हैं।
भारत के बड़े आर्थिक केंद्र जैसे , और में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, टैक्स एडवोकेट्स और कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स के बीच इस बॉट की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। जहां पहले किसी जीएसटी नोटिफिकेशन या टैक्स स्लैब की जानकारी पाने में घंटों लगते थे, वहीं अब यह बॉट कुछ ही सेकंड में सटीक जानकारी उपलब्ध करा रहा है।
इस AI बॉट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे सामान्य इंटरनेट डेटा से नहीं बल्कि मध्य भारत की प्रतिष्ठित टैक्स लॉ फर्म के अनुभवी वकीलों द्वारा प्रशिक्षित किया गया है।
यानी यह केवल डेटा आधारित उत्तर नहीं देता, बल्कि एक कानूनी विशेषज्ञ की तरह सलाह देने में सक्षम है। यही वजह है कि इसकी विश्वसनीयता बाजार में मौजूद अन्य AI टूल्स की तुलना में कहीं अधिक मानी जा रही है।
भारत में व्यापार करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए बदलते जीएसटी नियमों को समझना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे में यह बॉट उन्हें तुरंत यह जानकारी देता है कि:
किस प्रोडक्ट पर कितना टैक्स लागू होगा, वर्तमान नियम क्या हैं, किस HSN कोड के तहत टैक्स तय होगा, इसी वजह से विदेशों से इस प्लेटफॉर्म पर भारी ट्रैफिक दर्ज किया जा रहा है।
इस प्लेटफॉर्म का सबसे लोकप्रिय फीचर “रेट फाइंडर” है, जिसमें यूजर केवल किसी वस्तु का नाम लिखकर उसका जीएसटी रेट और संबंधित HSN कोड जान सकता है। आने वाले समय में सेवाओं के टैक्स रेट भी इसमें शामिल किए जाने की तैयारी है।
साथ ही वेबसाइट पर जीएसटी से जुड़े सभी: अधिनियम, नियम, नोटिफिकेशन, सर्कुलर एक ही जगह उपलब्ध हैं, जिससे वकीलों और सीए का काम बेहद आसान हो गया है।
तकनीकी दिग्गज के आंकड़ों के अनुसार, लॉन्च के केवल 8 महीनों में 62,000 से अधिक सक्रिय उपयोगकर्ता जुड़े, अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक सबसे ज्यादा अमेरिका, चीन और सिंगापुर से आया भारत में उपयोग के मामले में मुंबई सबसे आगे रहा, जबकि और दिल्ली के प्रोफेशनल्स भी तेजी से इसे अपना रहे हैं।
आज जब अधिकांश टेक प्लेटफॉर्म सब्सक्रिप्शन आधारित मॉडल पर काम करते हैं, वहीं विवेक सारस्वत ने इस AI बॉट को पूरी तरह निशुल्क रखा है। उनका मानना है कि “ज्ञान पर किसी का एकाधिकार नहीं होना चाहिए — यह सभी के लिए सुलभ होना चाहिए।” इस परियोजना का सर्वर और विकास खर्च वे स्वयं वहन कर रहे हैं।