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Chhattisgarh: Review of Jal Sanchay-Jan Bhagidari 2.0, target of 10 lakh water structures by May 31
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की संयुक्त अध्यक्षता में नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” अभियान के क्रियान्वयन की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

बैठक के दौरान बिलासपुर, दुर्ग और सूरजपुर जिलों के कलेक्टरों ने अभियान के तहत किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जल संकट केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक चुनौती भी है। इसे स्थायी समाधान की दिशा में ले जाने के लिए व्यापक जनभागीदारी अनिवार्य है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश का उल्लेख किया, जिसमें जल को प्रसाद के समान मानकर उसके प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन से प्रेरित होकर राज्य सरकार जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने के लिए प्रतिबद्ध है।
पहले चरण में देश में दूसरा स्थान
मुख्यमंत्री ने बताया कि अभियान के पहले चरण में छत्तीसगढ़ ने देशभर में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। सामुदायिक भागीदारी के मॉडल पर बोरवेल रिचार्ज, रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, रिचार्ज शाफ्ट, सोक पिट और ओपनवेल रिचार्ज जैसी संरचनाओं का बड़े पैमाने पर निर्माण किया गया।
प्रदेश में वर्तमान में 5 क्रिटिकल और 21 सेमी-क्रिटिकल भू-जल ब्लॉक चिन्हित हैं। वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में पांच ब्लॉकों में भू-जल निकासी में कमी और जल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है।
31 मई तक 10 लाख संरचनाओं का लक्ष्य
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि दूसरे चरण में तकनीक आधारित और परिणाममूलक रणनीति अपनाई जा रही है। राज्य सरकार ने 31 मई 2026 तक 10 लाख जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य तय किया है। इसे जल सुरक्षा की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया गया।

राज्य के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर 10 एकड़ से अधिक भूमि वाले चार लाख से अधिक किसानों को खेतों में डबरी निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे भू-जल स्तर में वृद्धि के साथ किसानों को सिंचाई और मछली पालन जैसी अतिरिक्त सुविधाएं मिलेंगी। जिला प्रशासन के साथ औद्योगिक समूहों का सहयोग भी लिया जा रहा है।
जियोटैगिंग और ‘जल मित्र’ की पहल
दूसरे चरण में सभी जल संरचनाओं की जियोटैगिंग, ग्राम पंचायत स्तर पर वॉटर बजट और जल सुरक्षा योजनाओं के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही गांवों के युवाओं को “जल मित्र” के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। क्रिटिकल ब्लॉकों में 65 प्रतिशत और सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों में 40 प्रतिशत जल संरक्षण कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
केंद्रीय मंत्री ने की सराहना
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों और प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि गत वर्ष जल संरक्षण के प्रयासों में राज्य का देशभर में दूसरा स्थान प्राप्त करना गौरव का विषय है। उन्होंने कलेक्टरों से मनरेगा के तहत प्राप्त राशि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने को कहा और जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो तथा जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव कांताराव सहित प्रदेश के सभी कलेक्टर वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।