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मुंबई: महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने ‘विमल इलायची’ के विज्ञापन को लेकर बॉलीवुड के तीन बड़े सितारों शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। FDA की यह कार्रवाई उस विवादित विज्ञापन को लेकर हुई है, जिस पर आरोप लगाया जा रहा है कि इलायची के नाम पर अप्रत्यक्ष रूप से ‘विमल पान मसाला’ का प्रचार किया जा रहा है।
महाराष्ट्र में पान मसाला और गुटखा प्रतिबंधित होने के चलते FDA ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। कार्रवाई FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में की गई है।
क्या है सरोगेट विज्ञापन का मामला?
टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अक्सर ऐसे विज्ञापन देखने को मिलते हैं, जिनमें किसी प्रतिबंधित या विवादित उत्पाद के बजाय उसी ब्रांड नाम से इलायची, माउथ फ्रेशनर या किसी अन्य उत्पाद का प्रचार किया जाता है। इसे आम तौर पर सरोगेट या छद्म विज्ञापन कहा जाता है।
FDA का आरोप है कि ‘विमल इलायची’ का विज्ञापन भी इसी तरह तैयार किया गया है। एजेंसी के मुताबिक, विज्ञापन में इस्तेमाल होने वाला ब्रांड नाम, विजुअल पहचान और मार्केटिंग स्टाइल लोगों के बीच सीधे तौर पर ‘विमल पान मसाला’ की ब्रांड पहचान को मजबूत कर सकता है।
नौ पन्नों के नोटिस में क्या कहा गया?
रिपोर्ट के मुताबिक, FDA की ओर से जारी नौ पन्नों के नोटिस में विज्ञापन को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। नोटिस में कहा गया है कि किसी ऐसे विज्ञापन को बढ़ावा देना, जो प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद की ब्रांडिंग या पहचान को अप्रत्यक्ष रूप से मजबूत करता हो, कानून के दायरे में जांच का विषय बन सकता है।
FDA ने खाद्य सुरक्षा और मानक (FSS) अधिनियम, 2006 के तहत भ्रामक विज्ञापन से जुड़े प्रावधानों का हवाला दिया है। विभाग का कहना है कि विज्ञापन का स्वरूप, ब्रांड का नाम और बाजार में उत्पाद की प्रस्तुति इस तरह डिजाइन नहीं होनी चाहिए कि उपभोक्ताओं के मन में प्रतिबंधित उत्पाद की छवि बने।
शाहरुख, अजय और टाइगर से मांगा गया पूरा ब्यौरा
FDA ने सिर्फ अभिनेताओं से स्पष्टीकरण नहीं मांगा है। नोटिस के जरिए विज्ञापन से जुड़े दस्तावेज भी तलब किए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, नोटिस शाहरुख खान के बांद्रा स्थित आवास ‘मन्नत’, अजय देवगन के जुहू स्थित घर और टाइगर श्रॉफ के प्रोडक्शन हाउस तक भेजे गए हैं।
अभिनेताओं से कथित तौर पर ये जानकारियां मांगी गई हैं—
- विज्ञापन से संबंधित करार की पूरी कॉपी
- कैंपेन ब्रीफ
- विज्ञापन की रणनीति और स्वरूप
- भुगतान और पैसों के लेनदेन का विवरण
- विज्ञापन में प्रमोट किए जा रहे उत्पाद से जुड़ी जानकारी
FDA यह स्पष्ट करना चाहता है कि कलाकार जिस उत्पाद का प्रचार कर रहे थे, वह वास्तव में केवल इलायची उत्पाद था या उसके जरिए प्रतिबंधित पान मसाला ब्रांड को अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया जा रहा था।
जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो क्या होगा?
मामले में अंतिम कार्रवाई अभिनेताओं के जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद तय होगी। रिपोर्ट में उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के तहत 10 लाख से 50 लाख रुपये तक के जुर्माने और कुछ परिस्थितियों में विज्ञापन करने पर प्रतिबंध जैसे प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि नोटिस जारी होना अपने आप में किसी अभिनेता को दोषी साबित नहीं करता। पहले संबंधित पक्षों का जवाब लिया जाएगा और उसके बाद ही कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई तय होगी।
अक्षय कुमार भी रह चुके हैं विवाद में
विमल के इस विज्ञापन अभियान को लेकर विवाद नया नहीं है। वर्ष 2022 में शाहरुख खान और अजय देवगन के साथ अक्षय कुमार भी विमल के विज्ञापन में नजर आए थे।
अक्षय कुमार को उस समय इस विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर भारी आलोचना का सामना करना पड़ा था। खास तौर पर इसलिए भी कि अभिनेता खुद फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े संदेशों के लिए जाने जाते हैं और तंबाकू विरोधी अभियानों से भी उनका जुड़ाव रहा है।
लगातार आलोचना के बाद अक्षय कुमार ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी और ब्रांड से अपना संबंध खत्म करने का ऐलान किया था। उन्होंने विज्ञापन से प्राप्त फीस को दान करने की बात भी कही थी।
इसके बाद विमल के विज्ञापन अभियान में अक्षय कुमार की जगह टाइगर श्रॉफ को शामिल किया गया।
अब फिर क्यों गरमाया मामला?
टाइगर श्रॉफ के इस कैंपेन से जुड़ने के बाद एक बार फिर सरोगेट विज्ञापन और सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट को लेकर बहस तेज हो गई है। सवाल यह है कि किसी ऐसे ब्रांड का प्रचार करते समय सेलिब्रिटीज की जिम्मेदारी कितनी होनी चाहिए, जिसके नाम और ब्रांडिंग से बाजार में कोई प्रतिबंधित उत्पाद भी जुड़ा हुआ हो।
महाराष्ट्र FDA की ताजा कार्रवाई इसी बड़े सवाल के बीच सामने आई है। अब शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को अपने विज्ञापन करार और कैंपेन से जुड़ी जानकारी देकर यह स्पष्ट करना होगा कि ‘विमल इलायची’ का प्रचार प्रतिबंधित पान मसाला उत्पाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नहीं किया गया था।
मामले में FDA की आगे की कार्रवाई इन जवाबों और दस्तावेजों की जांच के बाद तय होगी।