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रायपुर: छत्तीसगढ़ में माओवाद उन्मूलन अभियान के तहत अब तक करीब 2,900 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इनमें रामधर और पापाराव जैसे कुख्यात नक्सली भी शामिल हैं, जिन पर 25 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये तक का इनाम घोषित था। सरकार अब इन आत्मसमर्पित माओवादियों के पुनर्वास को लेकर नई रणनीति पर काम कर रही है।
आत्मसमर्पण करने वालों में लगभग 200 ऐसे माओवादी हैं, जिन पर कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन मामलों को वापस लेना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार एक विशेष कमेटी गठित करने जा रही है, जो यह तय करेगी कि किन मामलों में राहत दी जा सकती है।
हालांकि, इस विषय पर पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने कोई स्पष्ट जानकारी देने से इनकार किया है। वहीं गृह विभाग ने संकेत दिए हैं कि कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेकर जल्द ही कमेटी का गठन किया जाएगा।
राज्य की जेलों में वर्तमान में लगभग 3,000 माओवादी और उनके समर्थक बंद हैं। सरकार पुनर्वास नीति के तहत अच्छे आचरण वाले माओवादियों को रिहा करने पर भी विचार कर रही है। इसके लिए गृह मंत्री विजय शर्मा की अध्यक्षता में एक उपसमिति का गठन किया गया है।
पुनर्वास नीति के तहत कई पूर्व माओवादियों को हर महीने 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जबकि छह लोगों को सरकारी नौकरी भी प्रदान की जा चुकी है। सरकार का उद्देश्य उन्हें मुख्यधारा में शामिल कर आत्मनिर्भर बनाना है।
विधि विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक आत्मसमर्पित माओवादियों पर दर्ज मामलों को वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका पूर्ण पुनर्वास संभव नहीं है। केस लंबित रहने से न तो उन्हें रोजगार योजनाओं से जोड़ा जा सकता है और न ही सामाजिक रूप से स्थिर किया जा सकता है। इससे असंतोष पनपने का खतरा भी बना रहता है।
सरकार अब इस संतुलन को साधने की कोशिश में है—एक तरफ कानून व्यवस्था और न्याय, तो दूसरी ओर आत्मसमर्पित माओवादियों का पुनर्वास और समाज में पुनर्स्थापन।